Supreme Court : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। यह मामला स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और फॉर्म-6 में किए गए बदलावों से जुड़ा हुआ है।
अदालत की मुख्य टिप्पणियां और कार्यवाही
* निलंबन की मांग खारिज: याचिकाकर्ता की ओर से CEC को तुरंत निलंबित करने या उनकी शक्तियां सीमित करने की मांग की गई थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “अगर ऐसा हुआ तो चुनाव कौन कराएगा?”
* निर्णय पलटने का अधिकार: बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि कोई भी निर्णय कानून के अनुसार या सर्वसम्मति से नहीं लिया गया था, तो अदालत के पास उन आदेशों को रद्द करने की पूरी शक्ति है।
* मीडिया रिपोर्ट्स पर स्थिति: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर यह मानकर नहीं चला जा सकता कि सभी फैसले एकतरफा लिए गए थे। मामले की तह तक जाने के लिए पुख्ता तथ्यों की आवश्यकता है।
पूरा मामला क्या है?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में मुख्य रूप से निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं…..
* एकतरफा फैसले का आरोप: आरोप है कि SIR से जुड़े करीब 14 विवादित फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।
* फॉर्म-6 में बदलाव: याचिका में सवाल उठाया गया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश नहीं था, तो आखिर किसके कहने पर फॉर्म-6 में बदलाव किए गए।
* एसआईटी जांच और अन्य मांगें: याचिकाओं में इन विवादित फैसलों को पलटने, CEC पर मुकदमा चलाने और मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया की SIT जांच की मांग की गई है।
किस-किस को जारी हुआ नोटिस?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच (चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना) ने निम्नलिखित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है….
* केंद्र सरकार
* भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI)
” मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार
* अन्य चुनाव आयुक्त: डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी
* अधिकारी वर्ग: डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग और DG (IT) सीमा खन्ना
आगे क्या?
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से स्पष्ट और पारदर्शी जवाब मांगा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है, जिस पर देश भर की निगाहें टिकी हुई हैं।
