* मोहब्बत की दुकान पर कलह का पहरा: कांग्रेस कार्यालय में कुर्सी की जंग और अपनों का ही ‘रण’
Congress : राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में रविवार को जिस उल्लास और उम्मीद के साथ नए नेतृत्व के स्वागत की पटकथा लिखी जानी थी, वह देखते ही देखते आपसी खींचतान और सिर फुटौव्वल के अखाड़े में तब्दील हो गई। अवसर था नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद के पदभार ग्रहण समारोह का, लेकिन इस गरिमामयी मंच के पीछे छिपी अंदरूनी कलह उस वक्त बेनकाब हो गई जब पार्टी के दिग्गज और उनके समर्थक आमने-सामने आ गए।
जुबानी जंग से शुरू हुआ संग्राम
विवाद की चिंगारी तब भड़की जब नवनियुक्त अध्यक्ष की करीबी मानी जाने वाली नेता ममता चौधरी और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के खेमे आमने-सामने आ गए। तल्ख तेवरों के बीच ममता चौधरी की एक टिप्पणी ने आग में घी का काम किया—“तुम्हारी शक्ल नहीं देखनी, यहां से जाओ।”
इस अपमानजनक टिपण्णी ने फौरन सियासी पारे को आसमान पर पहुंचा दिया। जवाब में अजय राय ने भी दो टूक अंदाज में अपनी नाराजगी जताते हुए कह दिया—“औकात में रहो।” बस, फिर क्या था; बात मान-सम्मान की आन पर आ गई और दोनों पक्षों के बीच तू-तू, मैं-मैं का सिलसिला धक्का-मुक्की और अंततः जूते-चप्पलों की बौछार तक जा पहुंचा।
आधे घंटे तक रणक्षेत्र बना मुख्यालय
कांग्रेस दफ्तर करीब आधे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कैसे अनुशासन की सारी हदें ताक पर रख दी गईं। आरोप यह भी है कि इस हंगामे के दौरान महिला कार्यकर्ताओं के साथ भी अभद्रता की गई। स्थिति इतनी विकट हो गई कि अजय राय नाराज होकर कार्यालय से बाहर निकल आए और उनके समर्थकों ने ममता चौधरी से माफी मांगने और उन्हें बाहर करने की जिद पकड़ ली। उनका साफ कहना था कि जब तक मांग पूरी नहीं होती, अजय राय भीतर कदम नहीं रखेंगे।
प्रमोद तिवारी के जुड़े हाथ और राहुल गांधी का हस्तक्षेप
बढ़ते गतिरोध और फजीहत को भांपते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा संभाला। राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी और कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने स्थिति को संभालने के लिए पूरी ताकत झोंक दी।
एक मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला जब वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी अजय राय के सामने हाथ जोड़े खड़े नजर आए। इस बीच बनारस से आए अजय राय के समर्थक लगातार उनके सम्मान की दुहाई देते रहे। खबरों के मुताबिक, इस आंतरिक कलह पर खुद राहुल गांधी ने भी फोन पर अजय राय से बातचीत की। अंततः भारी मान-मनौव्वल और कशमकश के बाद अजय राय को किसी तरह मनाकर वापस कार्यक्रम में लाया गया।
सियासी गलियारों में कटाक्ष और नए सवाल
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने विपक्षी दलों को बैठे-बिठाए एक बड़ा हथियार दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इस घटना का वीडियो साझा करते हुए करारा तंज कसा और लिखा—“मोहब्बत की दुकान में जूतम-पैजार, कांग्रेस कार्यालय में नए प्रदेश अध्यक्ष ने पूर्व अध्यक्ष अजय राय का मान-मर्दन कर दिया।”
यह घटना भले ही अंततः मान-मनौव्वल के साथ शांत करा दी गई हो, लेकिन इसने उत्तर प्रदेश कांग्रेस के भीतर सुलग रही गुटबाजी और अंतर्विरोधों की परतें खोलकर रख दी हैं। जनता और राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल शिद्दत से पूछा जा रहा है कि जो दल ‘मोहब्बत’ और ‘एकता’ का संदेश देने निकला है, वह अपने ही आशियाने में अनुशासन और सद्भाव बनाए रखने में क्यों नाकाम साबित हो रहा है?
