Conggress : देश की राजनीति में इन दिनों न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर एक नया और तीव्र भूचाल आ गया है। कांग्रेस की केरल इकाई द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के संदर्भ में सोशल मीडिया पर की गई एक विवादास्पद टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस प्रकरण ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक बार फिर तीखा टकराव खड़ा कर दिया है।
पूरा घटनाक्रम: पोस्ट से लेकर इस्तीफे की मांग तक
हाल ही में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने अभूतपूर्व सुरक्षा प्रतिबंध लगाए थे। इसी संदर्भ में आए CJI के उस बयान—कि “कानून-व्यवस्था उनका अधिकार क्षेत्र नहीं है”—के जवाब में कांग्रेस की केरल इकाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखा संदेश पोस्ट किया।
इस पोस्ट में लिखा गया:
“प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका अधिकार क्षेत्र नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह कोई ऐसा ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।”
इस पोस्ट के सामने आते ही सियासी गलियारों में भूचाल आ गया। हालांकि, बढ़ते विरोध और चौतरफा आलोचना के बाद केरल कांग्रेस ने इस पोस्ट को अपने सोशल मीडिया हैंडल से डिलीट कर दिया।
भाजपा और किरेन रिजिजू का तीखा हमला
इस विवादित टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने कड़ा रुख अपनाया है..
किरेन रिजिजू का प्रहार: संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस पोस्ट को साझा करते हुए कांग्रेस पार्टी पर करारा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस का अगला मुख्य निशाना न्यायपालिका है और वह देश के सभी संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक संस्थानों को नष्ट करना चाहती है। उन्होंने आगे कहा कि विरोध जताना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक पदाधिकारियों पर इस तरह के हमले निंदनीय हैं।
भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया… भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस को “अराजकतावादी” करार देते हुए कहा कि यह देश के संविधान का खुला अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी सीधे तौर पर भारत के चीफ जस्टिस को धमकी दे रही है और गांधी-वाड्रा परिवार खुद को संविधान से ऊपर समझता है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की सख्त निंदा
इस पूरे घटनाक्रम पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने कड़ा संज्ञान लिया है। मानद सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा जारी प्रस्ताव में सीजेआई के इस्तीफे की मांग वाले बयानों की कड़ी निंदा की गई है।
* गरिमा बनाए रखने की अपील: SCBA ने स्पष्ट किया कि इस तरह के बयान न्यायपालिका की गरिमा, संस्थान की प्रतिष्ठा को कमतर आंकते हैं और न्याय प्रशासन में अनुचित हस्तक्षेप का प्रयास हैं।
* न्यायिक मर्यादा का सम्मान: एसोसिएशन ने अपने सदस्यों और सभी नागरिकों से अपील की है कि वे सर्वोच्च न्यायालय की मर्यादा और गरिमा को बनाए रखें।
पृष्ठभूमि: ‘इंडिया’ गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट का रुख
यह पूरा विवाद ऐसे समय में गहराया है जब सोमवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा अन्य आयुक्तों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और निर्वाचन आयोग के खिलाफ मार्च निकाला, जिसके बाद से राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक तापमान लगातार उफ़ान पर है।
