Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन देवी दुर्गा के तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। यह स्वरूप शांति, साहस और वीरता का प्रतीक है। माँ के मस्तक पर अर्धचंद्र के आकार की घंटी होने के कारण इन्हें “चंद्रघंटा” कहा जाता है।
इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान से माँ चंद्रघंटा पूजा विधि का पालन करते हैं, जिससे भय का नाश होता है और जीवन में साहस व आत्मबल का संचार होता है।
दुर्गा मां के तीसरे स्वरूप को शक्ति, दिव्य, तेजस्वी, साहस, शांति और पराक्रम का प्रतीक माना जाता है। मां चंद्रघंटा अपने भक्तों को भय से मुक्ति और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करती हैं। मां की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना करेंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार, 12 अक्टूबर 2026 के दिन रात में 10:14 मिनट से तृतीया तिथि शुरू हो चुकी है, जिसका समापन 13 अक्टूबर को रात 11:27 मिनट तक होगा।
नवरात्रि का तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा की पूजा का मुहूर्त, मंत्र, रंग, भोग
नवरात्र के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने वाले श्रद्धालु जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि मां की आराधना से मन में आत्मविश्वास और सकारात्मक विचारों का संचार होता है।
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन का मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:41 से 05:31
प्रातः सन्ध्या: सुबह 05:06 से 06:20
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:30
विजयमुहूर्त: दोपहर 02:03 से 02:49
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:54 से 06:19
सायाह्न सन्ध्या: शाम 05:54 से 07:08
अमृत काल: शाम 04:14 से 05:57
निशिता मुहूर्त: रात 11:43 से 12:32 बजे, अक्टूबर 14
रवि योग: रात 01:43 बजे, अक्टूबर 14 से सुबह 06:21 बजे, अक्टूबर 14
मां चंद्रघंटा का कैसा है स्वरूप?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है। इसी कारण इन्हें मां चंद्रघंटा कहा जाता है। मां का वाहन सिंह है और उनका स्वरूप साहस, शक्ति तथा निडरता का प्रतीक माना जाता है। मां का यह स्वरूप धर्म की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा भी देता है।
पूजा-विधि
1- सुबह उठ स्नान कर मंदिर साफ करें
2- दुर्गा माता के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा का गंगाजल से अभिषेक करें।
3- मैया को अक्षत, लाल चंदन, चुनरी, सफेद और लाल पुष्प अर्पित करें।
4- सभी देवी-देवताओं का जलाभिषेक कर फल, फूल और तिलक लगाएं।
5- भोग चढ़ाएं।
6- धूपबत्ती और घी का दीपक जलाएं
7- दुर्गा सप्तशती, कथा और दुर्गा चालीसा का पाठ करें
8 – माता की आरती करें।
9 – अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
चंद्रघंटा मां का पसंदीदा भोग- दूध की खीर, दूध से बनी मिठाई, फल
चंद्रघंटा मां का पसंदीदा रंग- लाल
चंद्रघंटा मां का पसंदीदा फूल- गुलाब और कमल
चंद्रघंटा मां का मंत्र
ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
ह्रीं श्री अम्बिकायै नम