Rahul Gandhi SIR Petition: चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट रिवीजन यानी ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) को लेकर विपक्ष का गुस्सा अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है। ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के बड़े मार्च के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं की ओर से शीर्ष अदालत में एक अर्जी दाखिल की गई है। इस याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से लेकर SIR प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाने समेत कुल 10 बड़ी मांगें रखी गई हैं। राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले कांग्रेस की लीगल टीम ने वकील एस. प्रसन्ना के जरिए याचिका दाखिल की। आइए जानते हैं कि याचिका में कौन-कौन सी 10 मांगें रखी गई हैं।
1. SIR प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेजों की पेशी
पूरी फाइलें और रिकॉर्ड जमा हो: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को निर्देश दिया जाए कि वह 24 जून 2025 से शुरू हुए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) से जुड़ी सभी फाइलें, समझौते, मिनट्स (बैठक का विवरण) और आपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड कोर्ट में पेश करे।
एक्सेस लॉग्स की मांग: SIR प्रक्रिया से संबंधित ERONET और ECINET डेटाबेस के पूरे एक्सेस लॉग्स और फाइल नोटिंग्स अदालत के सामने प्रस्तुत किए जाएं।
2. SIR निर्णयों की संवैधानिक और कानूनी समीक्षा
संवैधानिक वैधता की जांच: कोर्ट इस बात की समीक्षा करे कि SIR के तहत लिए गए फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, ‘मुख्य चुनाव आयुक्त एक्ट 2023’ की धारा 18 और पुराने न्यायिक मिसालों के सिद्धांतों के अनुरूप हैं या नहीं।
अवैध फैसलों को रद्द करना: यदि कोई भी निर्णय बिना उचित कानूनी अधिकार या तय प्रक्रिया के बिना लिया गया पाया जाता है, तो उसे तुरंत निरस्त (रद्द) किया जाए।
3. दोषी अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई
लापरवाही पर एक्शन: वोटर लिस्ट (निर्वाचक नामावली) की तैयारी और संशोधन में संवैधानिक या कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया जाए।
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत मामला: आवश्यकता पड़ने पर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ ‘लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950’ की धारा 32 के तहत आपराधिक/विभागीय कार्रवाई की जाए।
4. याचिकाकर्ताओं की शिकायतों का त्वरित निवारण
औपचारिक निर्णय की बाध्यता: चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि वह इस याचिका में उठाई गई सभी शिकायतों पर समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से औपचारिक फैसला ले।
पारदर्शिता और रिकॉर्ड की अनिवार्यता: आयोग द्वारा SIR से जुड़ा हर फैसला 2023 के अधिनियम की धारा 18 के तहत लिखित रूप से रिकॉर्ड और सुरक्षित रखा जाए।
5. ऑनलाइन फॉर्म-6 को वैधानिक नियमों के अनुरूप बनाना
नियमों का पालन: चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया जाए कि ऑनलाइन फॉर्म-6 पूरी तरह से ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत तय प्रारूप के मुताबिक ही हो।
बिना संशोधन बदलाव पर रोक: बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए और नियमों में औपचारिक संशोधन किए बिना फॉर्म-6 के प्रारूप में कोई भी मनमाना बदलाव न किया जाए।
6. पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र ऑडिट समिति का गठन
अधिकार प्राप्त निष्पक्ष कमेटी: सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त (Retired) जज की अगुवाई में एक स्वतंत्र जांच समिति बनाई जाए, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ और नागरिक समाज के प्रतिष्ठित लोग शामिल हों।
व्यापक ऑडिट का जिम्मा: यह समिति SIR के दौरान हटाए गए/बदले गए वोटरों, ERONET/ECINET डेटाबेस, और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) के तकनीकी आर्किटेक्चर/डिजाइन का गहन ऑडिट करे।
7. हटाए गए मतदाताओं की बूथ-वार सूची सार्वजनिक करना
कारण और डेटा का खुलासा: चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनकी बूथ-वार सूची सार्वजनिक करे।
वर्गीकरण और पुनर्गठन: नाम हटाने के ठोस कारण के साथ-साथ उनका लिंग और उम्र के अनुसार वर्गीकरण जारी किया जाए और पात्र पाए गए लोगों के नाम वापस जोड़ने का पारदर्शी सिस्टम बनाया जाए।
8. बिना सुनवाई और नोटिस के नाम हटाने पर पूर्ण रोक
प्राकृतिक न्याय का पालन: आयोग को सख्त निर्देश दिया जाए कि किसी भी वैध नागरिक का नाम बिना लिखित नोटिस दिए और सुनवाई का उचित अवसर प्रदान किए वोटर लिस्ट से न हटाया जाए।
कट-ऑफ डेट तक आवेदन का अवसर: पंजाब और अन्य चुनाव वाले राज्यों में सभी योग्य लोगों को कानूनन तय कट-ऑफ तारीख तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने के आवेदन की छूट दी जाए।
9. देशव्यापी चल रही SIR प्रक्रिया पर तत्काल अंतरिम रोक (Stay)
प्रक्रिया पर स्टे: जब तक सुप्रीम कोर्ट इस याचिका में उठाए गए गंभीर संवैधानिक मुद्दों और अनियमितताओं पर अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक देश के सभी राज्यों में जारी SIR प्रक्रिया पर तुरंत अंतरिम रोक लगाई जाए।
मताधिकार की सुरक्षा: यह रोक योग्य नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा और चुनाव प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए अनिवार्य बताई गई है।
10. चुनावी निष्पक्षता के लिए अन्य आवश्यक अदालती आदेश
अदालत का सर्वाधिकार: याचिका में सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की गई है कि वह मामले की गंभीरता को देखते हुए कोई भी अन्य उपयुक्त, अतिरिक्त या दिशा-निर्देशात्मक आदेश पारित करे।
स्वतंत्र चुनाव की गारंटी: देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जो भी कदम उचित समझें, उन्हें लागू किया जाए।
SC में दाखिल याचिका में 14 खामियां कौन-सी? ₹220 की फीस से वकालतनामे तक
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी (INDIA) गठबंधन के बड़े चेहरों को सुप्रीम कोर्ट से एक अजीबोगरीब झटका लगा है। चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के खिलाफ दायर की गई उनकी अर्जी में अदालत ने एक-दो नहीं, बल्कि पूरी 14 गलतियां निकाल दी हैं। मजे की बात तो यह है कि इन कमियों में कोर्ट फीस के महज 220 रुपये कम पड़ना भी शामिल है। अब कानूनी खामियां दुरुस्त होने तक मामले की सुनवाई अटक गई है। आईए एक-एक करके जानते हैं कि कौन सी 14 खामियां पाई गईं, जिसे लेकर राहुल गांधी की पिटीसन पर फिलहाल सुनवाई होने में अड़चन दिख रही है?
याचिका में क्या मिलीं 14 खामियां?
1. लिस्टिंग प्रोफॉर्मा में गलती: याचिका की लिस्टिंग से जुड़े फॉर्म में प्रतिवादी का नाम सही करने को कहा गया।
2. प्रतिवादियों का गलत विवरण: याचिका के पेज नंबर 9 पर प्रतिवादियों से जुड़ी जानकारी में गलती बताई गई।
3. निजी पक्षों को प्रतिवादी बनाने पर सवाल: रजिस्ट्री ने पूछा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका में निजी पक्षों को प्रतिवादी क्यों बनाया गया है।
4. पहले की याचिका से जुड़ा पैराग्राफ नहीं मिला: समान प्रकृति की पिछली याचिका से संबंधित जरूरी पैराग्राफ नहीं मिलने पर आपत्ति दर्ज की गई।
5. याचिका की मांगों में प्रतिवादी का नंबर गलत: प्रार्थना वाले हिस्से में प्रतिवादी के क्रमांक को ठीक करने के लिए कहा गया।
6. 24 जून 2025 के फैसले की कॉपी नहीं लगी: याचिका में जिस फैसले का उल्लेख किया गया है, उसकी कॉपी संलग्न करने को कहा गया।
7. अनुलग्नक P2 की तारीख में अंतर: दस्तावेज Annexure P2 पर दर्ज तारीख और संबंधित विवरण में मेल नहीं पाया गया।
8. दो पेजों की रंगीन कॉपी मांगी: पेज नंबर 57 और 64 के लिए रंगीन प्रतियां जमा करने को कहा गया।
9. अनुलग्नक P5 में केस नंबर की गड़बड़ी: दस्तावेज Annexure P5 में दर्ज केस नंबर का मिलान नहीं हुआ।
10. पेन ड्राइव जमा करने को कहा: Annexure P6 से संबंधित डिजिटल दस्तावेजों के लिए पेन ड्राइव जमा करने की आपत्ति दर्ज की गई।
11. नौ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामे नहीं मिले: याचिकाकर्ता नंबर 3 से 11 तक के वकालतनामे गायब थे। इनमें सौगत राय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, एमए बेबी, डी राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं।
12. मल्लिकार्जुन खड़गे के ID कार्ड की कॉपी अस्पष्ट: याचिकाकर्ता नंबर 2 मल्लिकार्जुन खड़गे के पहचान पत्र की साफ और पढ़ने योग्य कॉपी मांगी गई।
13. कोर्ट फीस में ₹220 की कमी: रजिस्ट्री के मुताबिक, निर्धारित कोर्ट फीस के मुकाबले ₹220 अतिरिक्त जमा करने की जरूरत थी।
14. पेजों की स्पष्टता और नंबरिंग में गड़बड़ी: कुछ पेजों का टेक्स्ट धुंधला या अपठनीय था, फॉन्ट छोटा था, कुछ पेज गायब थे या स्थानीय भाषा में थे और पेज नंबरिंग में विसंगतियां थीं। अंतिम प्रिंट निकालने के बाद संबंधित पेजों की खामियां बताने को कहा गया।