SIR : सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई… चुनाव आयोग के फैसलों और वोटर लिस्ट विवाद पर राहुल गांधी समेत 13 नेताओं की याचिका पर नजर

Bindash Bol

SIR : भारतीय राजनीति और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत 13 प्रमुख विपक्षी नेताओं (INDIA ब्लॉक) द्वारा दायर की गई इस याचिका पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच सुनवाई करेगी।

याचिका के मुख्य बिंदु और विपक्ष की मांगें

​इस याचिका में चुनाव आयोग (ECI) के कई महत्वपूर्ण फैसलों को चुनौती दी गई है, साथ ही चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई हैं…

* ​एसआईआर (SIR) पर रोक: 24 जून 2025 से शुरू हुई स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया पर रोक लगाने और इससे जुड़े ECINET तथा ERONET सिस्टम के सभी दस्तावेजों, बैठकों के मिनट्स, आंतरिक नोटिंग्स और डिजिटललॉग्स को अदालत में पेश करने की मांग की गई है।

* ​स्वतंत्र तकनीकी कमेटी का गठन: सुप्रीम कोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में तकनीकी विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति बनाने का अनुरोध किया गया है, जो वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों और ईवीएम से जुड़ी तकनीकों व प्रक्रियाओं का निष्पक्ष ऑडिट कर सके।

* ​नाम हटाने के कारणों का प्रकटीकरण: विपक्ष ने मांग की है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनकी बूथ-वार सूची और नाम हटाने के ठोस कारणों को सार्वजनिक किया जाए।

* ​मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा: बिना पूर्व नोटिस या सुनवाई का अवसर दिए किसी भी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। इसके साथ ही, संवैधानिक नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, ऑनलाइन फॉर्म-6 के लिए पूर्व नियमों की बहाली और हर नागरिक के मताधिकार की पुख्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के कदम उठाने की अपील की गई है।

तकनीकी कमियों को दूर कर सुनवाई के लिए लिस्टिंग

​इससे पूर्व, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री द्वारा याचिका में कुछ तकनीकी कमियां (जैसे- पहचान से जुड़े अस्पष्ट दस्तावेज, कुछ पृष्ठों का स्पष्ट न होना, कुछ याचिकाकर्ताओं के वकालतनामा का अभाव और कोर्ट फीस में 220 रुपये की कमी) इंगित की गई थीं, जिसके कारण यह 13 अक्टूबर को सूचीबद्व नहीं हो सकी थी। हालांकि, इन सभी कमियों को समय रहते दुरुस्त कर लिया गया और इस प्रक्रिया के दौरान दो नए याचिकाकर्ताओं के जुड़ने से कुल याचिकाकर्ताओं की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
​चुनावी शुचिता, मतदाता अधिकारों की सुरक्षा और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के संबंध में यह मामला देश की राजनीति और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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