SC : विपक्ष की याचिका पर ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट ने मार्च निकालने पर राहुल से भी मांगी सफाई

Bindash Bol

* ‘कमजोर कोशिशें, हमें सब पता है’: सुप्रीम कोर्ट की दो टूक और राहुल गांधी के मार्च पर सियासी घमासान

SC : भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के गलियारों में एक बार फिर गर्माहट अपने चरम पर है। 12 अक्टूबर 2026 को राजधानी दिल्ली की सड़कों से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत तक जो कुछ भी घटा, उसने देश की राजनीतिक फिजा को पूरी तरह से गरमा दिया है। चुनाव आयोग की ‘एसआईआर’ (SIR) प्रक्रिया और तथाकथित ‘वोट चोरी’ के गंभीर आरोपों के खिलाफ विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) ब्लॉक ने आक्रामक तेवर अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट तक एक बड़ा मार्च निकाला था। इस राजनीतिक ड्रामे और उसके बाद अदालत में हुई तीखी टिप्पणियों ने एक नए भूचाल को जन्म दे दिया है।

सत्ता के गलियारों में हलचल: क्या है पूरा घटनाक्रम?

* ​विपक्ष का आक्रामक मार्च: 12 अक्टूबर की शाम को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी दिग्गजों के नेतृत्व में बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक एक विशाल मार्च निकाला गया।

* ​मुख्य मांगें: राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग की ‘एसआईआर’ प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

* ​अदालत का कड़ा रुख: अदालत ने 12 अक्टूबर को हुए इस प्रदर्शन और उस दौरान मचे भारी हंगामे तथा अव्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा कि याचिकाकर्ता (राहुल गांधी) को इस आचरण और अपनी मंशा पर स्पष्टीकरण देना ही होगा।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) के तीखे और आक्रामक तेवर

​वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया द्वारा अदालत के भीतर हुई घटनाओं और वकीलों को डराने-धमकाने की कोशिशों का मुद्दा उठाने पर, CJI सूर्यकांत ने बेहद सख्त और बेबाक अंदाज में व्यवस्था विरोधी ताकतों को करारा संदेश दिया…

​”कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता। ये कमजोर कोशिशें हैं, जिन पर कोई ध्यान नहीं देता। बाहर वे बयान देते हैं। हम कोई अलग-थलग दुनिया में नहीं बैठे हैं, हमें सब पता है कि क्या हो रहा है!”
​यह बयान इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सर्वोच्च अदालत बाहरी राजनीतिक दबावों और हुड़दंग को लेकर पूरी तरह सतर्क है और अपनी गरिमा से समझौता करने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

अदालत के प्रमुख निर्देश एवं कार्रवाई

* ​सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि प्रदर्शन स्थल से जुड़े सभी सीसीटीवी और वीडियो साक्ष्यों को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर अदालत में उनका इस्तेमाल किया जा सके।

* ​जंतर-मंतर के ‘डिनोटिफ़िकेशन’ पर सवाल: अदालत ने सरकार से तीखा सवाल किया है कि क्या जंतर-मंतर को आम प्रदर्शन स्थल के रूप में प्रतिबंधित (डिनोटिफाई) करने का निर्णय किसी न्यायिक टिप्पणी के कारण लिया गया या यह एक सोची-समझी प्रशासनिक उपयोगिता का परिणाम है। (सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि इसके पीछे एक लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया और एक विशेष समिति की विस्तृत रिपोर्ट थी)।

* ​चुनाव आयोग और केंद्र को नोटिस: अदालत ने एसआईआर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और असदुद्दीन ओवैसी की याचिका पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

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