Navratri 2026 : नवरात्रि की महानवमी आज, इस दिन करें मां सिद्धिदात्रि की पूजा, जानें मंत्र और भोग

Bindash Bol

Navratri 2026 : आज महानवमी है, आज के दिन मां के सिद्धिरूप की पूजा होती है. मां दुर्गे के इसी रूप को शतावरी और नारायणी भी कहते हैं. दुर्गा के सभी प्रकारों की सिद्धियों को देने वाली मां की पूजा का आरंभ निम्न श्लोक से करना चाहिए.

या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं. नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है. इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है.

नवदुर्गाओं में माँ सिद्धिदात्री अंतिम हैं. सिद्धिदात्री का जो मनुष्य नियमपूर्वक सेवन करता है. उसके सभी कष्ट स्वयं ही दूर हो जाते हैं. इससे पीड़ित व्यक्ति को सिद्धिदात्री देवी की आराधना करना चाहिए. अपनी सारी गलतियों के लिए मां से सच्चे दिल क्षमा मांगनी चाहिए,मां जरूर माफ कर देती हैं.

मां सिद्धिदात्री का स्वरूप

मां सिद्धिदात्री का रूप अत्यंत ही दिव्य है. मां का वाहन सिंह है. यह कमल पर भी आसीन होती हैं. इनकी चार भुजाएं हैं. दाहिने ओर के नीचे वाले हाथ में चक्र,ऊपर वाले हाथ में गदा और बाईं ओर के नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले हाथ में कमल का फूल है. मां सिद्धिदात्री को देवी सरस्वती का भी स्वरूप माना गया है. इन्हें बैंगनी रंग अतिप्रिय होता है. मां सिद्धिदात्री की अनुकंपा से ही शिवजी का आधा शरीर देवी का हुआ और इन्हें अर्द्धनारीश्वर कहा गया. मां सिद्धिदात्री का पूजा मंत्र है-

या देवी सर्वभू‍तेषु मां सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां सिद्धिदात्री की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठों सिद्धियों को प्राप्त किया था. मां सिद्धिदात्री की अनुकंपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी हो गया था और वह अर्धनारीश्वर कहलाएं. मां दुर्गा के नौ रूपों में यह रूप अत्यंत ही शक्तिशाली रूप है. कहा जाता है कि, मां दुर्गा का यह रूप सभी देवी-देवताओं के तेज से प्रकट हुआ है. कथा में वर्णन है कि जब दैत्य महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवतागण भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे. तब वहां मौजूद सभी देवतागण से एक तेज उत्पन्न हुआ और उसी तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा जाता है.

महानवमी पर क्या करना चाहिए?

महानवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ कन्या पूजन और हवन का विशेष महत्व माना जाता है. इस दिन नौ कन्याओं को मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनका पूजन किया जाता है और उन्हें पूरी, काले चने और हलवा खिलाया जाता है. कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा और उपहार दिए जाते हैं. वहीं, नवरात्रि की साधना की पूर्णता के लिए हवन और यज्ञ किया जाता है. इसमें दुर्गा सप्तशती के मंत्रों के साथ आहुतियां अर्पित की जाती हैं. भक्त इस दिन मां से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं.

महानवमी शुभ मुहूर्त 2026

पंचांग के अनुसार, इस साल नवमी तिथि की शुरुआत 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर होगी और इसका समापन 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर होगा. ऐसे में 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी दोनों तिथियां पड़ रही हैं.

* नवमी तिथि शुरू: 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे

* नवमी तिथि समाप्त: 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे

* कन्या पूजन का अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:43 बजे से 12:29 बजे तक

* नवरात्रि व्रत पारण: 20 अक्टूबर, मंगलवार को

मां सिद्धिदात्री का भोग

* प्रिय रंग और फूल: इन्हें सफेद रंग प्रिय है और इस दिन सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं.

* भोग: माता को मिष्ठान, पंचमेवा, खीर, हलवा, फल और नारियल का भोग लगाया जाता है

मां सिद्धिदात्री की पूजा कैसे करें?

* सुबह स्नान करें: महानवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें.

* पूजा स्थान तैयार करें: पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़ककर उसे पवित्र करें. लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां सिद्धिदात्री की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें.

* मां को तिलक और फूल चढ़ाएं: देवी को गंगाजल अर्पित करें. इसके बाद रोली, कुमकुम और चंदन से तिलक करें और कमल या अन्य ताजे फूल चढ़ाएं.

* दीपक जलाकर भोग लगाएं: घी का दीपक और धूपबत्ती जलाएं. मां को खीर, हलवा, पूरी, चने, नारियल और फलों का भोग अर्पित करें.

* मंत्र जाप और पाठ करें: मां सिद्धिदात्री के मंत्र का जाप करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें.

* आरती करें: पूजा के अंत में घी या कपूर से मां की आरती उतारें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें.

* कन्या पूजन करें: नौ कन्याओं और एक बालक को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं. इसके बाद उन्हें दक्षिणा या उपहार देकर आशीर्वाद लें.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. बिंदास बोल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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