Uttarakhand :  मदरसों में अब शुक्रवार की जगह रविवार को होगी छुट्टी, धामी सरकार का फैसला

Bindash Bol

Uttarakhand : उत्तराखंड में मदरसों को लेकर धामी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने के तहत इसे शिक्षा विभाग के नियमों के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसी कड़ी में सरकार ने शुक्रवार की छुट्टी रद्द करते हुए  रविवार को साप्ताहिक अवकाश रखने के निर्देश दिए गए हैं. इस लिहाज से सरकार ने साफ कर दिया है कि जब मदरसों को स्कूल के रूप में मान्यता दी जा रही है, तो उन्हें भी दूसरे स्कूलों की तरह शिक्षा विभाग के नियमों का पालन करना होगा.

आपको बता दें कि उत्तराखंड में इससे पहले मदरसा बोर्ड से 452 मदरसे मान्यता प्राप्त थे. नई व्यवस्था के तहत अब तक 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता दी गई है. इस दौरान फिलहाल 114 आवेदन शिक्षा विभाग में लंबित हैं. वहीं पहले चरण में 250 अवैध मदरसों को सील किया जा चुका है. सरकार अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में निर्धारित पाठ्यक्रम लागू करने और संचालन की व्यवस्था को नियमों के अनुरूप बनाने पर जोर दे रही है.

किन पर लागू होगा यह नियम ?

* उन सभी 206 मदरसों पर लागू होगा, जिन्होंने शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त कर ली है या मान्यता लेने के लिए आवेदन किया है.

* मदरसा शिक्षा को तय शैक्षणिक मानकों के अनुसार ढालना और यहां पढ़ने वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना है.

* 206 मदरसों में पढ़ने वाले लगभग 30,000 से अधिक छात्र इस नए नियम के दायरे में आएंगे.

* प्रदेश में अब तक 76 मदरसों को शिक्षा विभाग से मान्यता मिल चुकी है और 114 मदरसों की मान्यता प्रक्रिया जारी है.

मदरसों में शुक्रवार की छुट्टी बंद

* उत्तराखंड के मदरसों की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है.

* राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने शुक्रवार की छुट्टी बंद की.

* मदरसों में बाकी शिक्षण संस्थानों की तरह रविवार को अवकाश रहेगा.

* उत्तराखंड मदरसा बोर्ड की जगह ‘अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ संभाल रहा जिम्मेदारी

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू!

इस लिहाज से जुलाई में उत्तराखंड सरकार ने शिक्षा नीति में एक बड़ा बदलाव करते हुए उत्तराखंड मदरसा बोर्ड को समाप्त कर दिया था. इसकी जगह अब ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ करने का फैसला किया था.  इस बड़े बदलाव 1 जुलाई से राज्य के सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में आ गए.

मदरसा बोर्ड को अपनाना पड़ा उत्तराखंड बोर्ड के पाठ्यक्रम

नए नियमों के अनुसार, मदरसों को पारंपरिक शिक्षण व्यवस्था से आगे बढ़ते हुए जुलाई 2026 से उत्तराखंड बोर्ड के पाठ्यक्रम को अपनाना पड़ा. इस नए पाठ्यक्रम में विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और कंप्यूटर विज्ञान जैसे आधुनिक विषयों को प्राथमिकता दी जा रही है.

दिशानिर्देशों का पालन नहीं करेंगे पालन तो होंगे बैन!

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो संस्थान इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है और उन्हें बंद भी किया जा सकता है.

इस फैसले को लेकर शादाब शम्स ने कहा था कि, ‘मदरसा शिक्षा बोर्ड अप्रभावी हो गया था और मुस्लिम बच्चों की शिक्षा के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा था. उसका पाठ्यक्रम इतना पुराना और जटिल था कि आम व्यक्ति के लिए उसे समझना भी मुश्किल था. नई व्यवस्था का उद्देश्य मदरसा शिक्षा में अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार लाना है.”

सरकार का कहना है कि स्कूल के रूप में मान्यता मिलने के बाद संस्थान अपनी सुविधा के अनुसार अलग नियम नहीं चला सकते. उन्हें निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर और विभागीय निर्देशों का पालन करना होगा. सीएम धामी साफ कर चुके हैं कि सरकार ऐसी शिक्षा व्यवस्था चाहती है, जिसमें सभी बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले और शिक्षण संस्थानों के संचालन में नियमों का समान रूप से पालन हो.

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