Papankusha Ekadashi 2026 : पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को किया जा रहा है. इस एकादशी को धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना गया है, इसलिए इस दिन लोग श्रद्धानुसार व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करते हैं. हर साल आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर यह व्रत किया जाता है. पापांकुशा एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 02:11 बजे शुरू होकर 22 अक्टूबर को दोपहर 02:47 बजे समाप्त होगी. व्रत का पारण 23 अक्टूबर, शुक्रवार को सुबह 06:27 बजे से सुबह 08:42 बजे के बीच किया जाएगा.
ये पावन तिथि सभी प्रकार के पापों का नाश करके मोक्ष प्रदान करती है. धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी का व्रत करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ और सौ सूर्य यज्ञ करने के समान पुण्य फल मिलता है. ऐसा माना जाता है कि ये व्रत करने वाले व्यक्ति के मातृपक्ष (10 पीढ़ी), पितृपक्ष (10 पीढ़ी) और पत्नी के पक्ष (10 पीढ़ी) यानी कुल 30 पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है. इस दिन व्रत कथा का पाठ करना या सुनना बहुत शुभ माना जाता है और इससे पूर्ण फल मिलता है.
पापांकुशा एकादशी शुभ मुहूर्त
* ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:50 बजे से सुबह 05:38 बजे तक
* अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक
* विजय मुहूर्त: दोपहर 01:57 बजे से दोपहर 02:44 बजे तक
* पारण तिथि व समय: 23 अक्टूबर, सुबह 06:27 बजे से 08:42 बजे तक
पापांकुशा एकादशी व्रत कथा
पद्मपुराण के अनुसार, पापांकुशा एकादशी की व्रत कथा भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी. पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में विंध्य पर्वत पर ‘क्रोधन’ नाम का एक बहुत क्रूर बहेलिया रहता था. उसका सारा जीवन हिंसा, लूटपाट, मद्यपान और बुरे कर्मों में बीता. जब उसकी मृत्यु का समय आया, तब यमराज के दूत उसके पास आए और बोले कि कल तुम्हारे जीवन का अंतिम दिन है. यह सुनकर क्रोधन बहुत भयभीत हो गया.
घबराकर वो महर्षि अंगिरा के आश्रम में पहुंचा और उनके चरणों में गिरकर बोला कि मैंने जीवन में सिर्फ पाप किए हैं, मुझे इस संकट से बाहर निकालिए. महर्षि अंगिरा ने उस पर कृपा की और उसे आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की ‘पापांकुशा एकादशी’ का विधि-विधान से व्रत रखने का उपदेश दिया. बहेलिए ने महर्षि के बताए अनुसार पूरी श्रद्धा, उपवास और रात्रि जागरण के साथ यह व्रत किया. इस व्रत के प्रभाव से उसके सारे पाप नष्ट हो गए और मृत्यु के बाद उसे भगवान विष्णु के धाम (विष्णु लोक) की प्राप्ति हुई.
पापांकुशा एकादशी का महत्व
भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि यह एकादशी मनुष्य के समस्त पापों को अंकुश (नियंत्रण या समाप्त) की तरह रोक लेती है, इसलिए इसे ‘पापांकुशा’ कहते हैं. इस दिन भगवान विष्णु (पद्मनाभ रूप) की पूजा और रात्रि जागरण करने से दस पीढ़ियों का उद्धार होता है तथा बैकुण्ठ धाम मिलता है.
गरुड़ पुराण की मानें तो इस दिन भगवान विष्णु (पद्मनाभ रूप) की पूजा और रात्रि जागरण करने वाले को मृत्यु के बाद यमराज के कष्ट नहीं सहने पड़ते और सीधे विष्णु लोक (बैकुंठ) की प्राप्ति होती है. इस दिन सोना (स्वर्ण), तिल, भूमि, गाय, अन्न, जल, छाता और जूते (उपानह) का दान करने से विशेष पुण्य मिलता है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. बिंदास बोल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.