Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें ये खास उपाय, जानें पूजा का महत्व

Maneesh Kumar Tiwari

* शरद पूर्णिमा आज, रात में इस विधि से करें मां लक्ष्मी की पूजा…

Sharad Purnima 2026:  सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व मां लक्ष्मी की आराधना, चंद्रमा की पूजा और सुख-समृद्धि की कामना के लिए खास होता है। इस अवसर पर कुछ पारंपरिक उपाय किए जाते हैं, जिनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। आइए जानते हैं शरद पूर्णिमा की पूजा-विधि, खीर बनाने की परंपरा और मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए किए जाने वाले उपाय।

शरद पूर्णिमा कब मनाई जाएगी?

पंचांग के अनुसार, 24 अक्टूबर 2026 को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होगी। शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। शाम के समय पूजा-पाठ और मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।

शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की कृपा पाने के उपाय

* शरद पूर्णिमा की शाम घर के पूजा स्थल पर मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की विधि-विधान से पूजा करें। दीपक जलाएं और पुष्प अर्पित करके परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

* धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा पर श्री सूक्त, लक्ष्मी सूक्त और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है। श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जाप करने से मन को शांति मिलती है और भक्त मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

* इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान चांदी के सिक्के और सात कौड़ियां रखकर उनकी पूजा करने की परंपरा है। इन्हें हल्दी और केसर अर्पित करके मां लक्ष्मी से धन-धान्य और बरकत की प्रार्थना करें। पूजा के बाद इन्हें साफ-सुरक्षित स्थान या तिजोरी में रखा जा सकता है।

* शरद पूर्णिमा पर श्री यंत्र की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मां लक्ष्मी का स्मरण करें और श्री सूक्त का पाठ करें। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मकता और समृद्धि की कामना की जाती है।

शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने की परंपरा क्यों है?

शरद पूर्णिमा पर चावल और दूध से खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृत के समान गुणों वाली मानी जाती हैं। इसी विश्वास के चलते खीर को रात में खुले स्थान पर रखने और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की परंपरा है। मौसम में बदलाव के दौरान दूध से बनी खीर खाना भी भारतीय खानपान की परंपराओं का हिस्सा रहा है। हालांकि, चंद्रमा की किरणों से खीर में औषधीय गुण या अमृत बनने का दावा धार्मिक मान्यता है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं।

शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस रात मां लक्ष्मी के पूजन और जागरण का विशेष महत्व बताया गया है। भक्त धन, सुख, शांति और परिवार की खुशहाली के लिए मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं। इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करना, जरूरतमंदों की सहायता करना और परिवार के साथ पर्व मनाना शुभ माना जाता है। पूजा के साथ स्वच्छता, संयम और सेवा जैसे मूल्यों को अपनाना भी इस त्योहार की भावना को सार्थक बनाता है।

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की जानकारियों पर आधारित है.  बिंदास बोल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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