Sawan 2nd Somwar 2025 : सावन का दूसरा सोमवार आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि

Bindash Bol

Sawan 2nd Somwar 2025 : सावन का दूसरा सोमवार आज है. श्रावण माह में सोमवार के व्रत का विशेष महत्व होता है. इस दिन भक्त देवों के देव महादेव के लिए व्रत करते हैं और उनकी आराधना करते हैं. सावन के सोमवार पर नियमों का अच्छे से पालन करना चाहिए तभी उसका फल प्राप्त होता है. सावन का महीना भोलेनाथ की पूजा के लिए शुभ और पवित्र माना गया है.

साल 2025 में सावन माह में कुल 4 सोमवार पड़ेंगे. हर सोमवार का अपना अलग महत्व है. इस दिन भक्त भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं और शिवलिंग पर उनकी प्रिय चीजें उनको अर्पित करते हैं. सावन में सोमवार की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ की जाएं तो उसका फल प्राप्त होता है. सावन का महीना बहुत खास होता है इस माह में पड़ने वाले व्रत और त्योहार भी अपना अलग महत्व रखते हैं. जानते हैं इस दिन कैसे करें भोलेनाथ की पूजा-अर्चना, यहां पढ़ें संपूर्ण विधि.

सावन 2025 सोमवार पूजन-विधि

  • सोमवार को शिव जी की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें.
  • पूजा स्थल को साफ करके शिवलिंग और शिव जी की मूर्ति स्थापित करें.
  • इसके बाद शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से करें.
  • बेलपत्र, फूल, धूप-दीप शिवलिंग पर अर्पित करें.
  • ॐ नमःशिवायमंत्र का जाप करें.
  • शिव जी की आरती करें और प्रसाद का भोग लगाएं.

सावन में शिवलिंग पर क्या अर्पित करें?

सावन में सोमवार के दिन शिवलिंग पर खास तरह की चीजें अर्पित करें. ऐसा करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं और घर परिवार में खुशियां बनी रहती हैं. इस दिन शिवलिंग पर गाय के दूध से बना शुद्ध घी अर्पित करें. साथ ही इस दिन शिवलिंग पर शमी के फूल अर्पित करें. सावन में सोमवार के दिन शिवलिंग पर शुद्ध जल अर्पित करें, ऐसा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है.

भोलेनाथ की दो आरती, जिसके बिना अधूरी है शिव जी की पूजा

सावन माह के सोमवार पर जितना महत्व शिवलिंग पर जलाभिषेक का है उतना ही महत्व उनकी आरती का भी है. सावन माह में पूजा समाप्त करने से पहले शिव जी आरती जरूर पढ़ें, अन्यथा इसके बिना शिव जी की पूजा अधूरी मानी जाती है. यहां पढ़ें शिव जी की दो आरती.

जय शिव शंकर, जय त्रिपुरारी। जय गिरिजापति, दीन दयाली॥
भूतनाथ हर, गिरिजा प्यारे। सदा बसो तुम ह्रदय हमारे॥

नेत्र तीन सुन्दर त्रिनयना। भाल शशिधर गंगा धारा॥

धर अधर विष भाल शशिधारी। कंठ विराजे नाग बिहारी॥

व्याघ्र चर्म परिधान तुम्हारा। माथे शोभे चंद्र सितारा॥

धूप दीप नेवेद्य चढ़ाएं। श्रद्धा सहित पूजा कराएं॥

कर्पूर गौंरं करुणावतारं। संसार सारं भुजगेन्द्र हारं॥

सदा वसन्तं हृदयारविन्दे। भवं भवानी सहितं नमामि॥

शिवजी की दूसरी आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

अक्षमाला वनमाला, मुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै, भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी ।

सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरती जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…॥

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