Anish Dayal Singh : कौन हैं आईपीएस अनीश दयाल सिंह, जिन्हें सरकार ने बनाया डिप्टी NSA

Bindash Bol
  • 30 साल IB में रहे, अब सरकार ने बनाया डिप्टी एनएसए

Anish Dayal Singh : सीआरपीएफ और आईटीबीपी के पूर्व महानिदेशक अनीश दयाल सिंह को डिप्टी NSA नियुक्त किया गया है और उन्हें आंतरिक मामलों को संभालने का दायित्व सौंपा गया है. अनीश मणिपुर कैडर के 1988 बैच के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी रहे हैं. पिछले साल दिसंबर में वो सेवानिवृत्त हुए थे. डिप्टी एनएसए अनीश दयाल सिंह के पास इंटेलिजेंस ब्यूरो में करीब 30 साल का लंबा अनुभव है. सीआरपीएफ के प्रमुख के रूप में उन्होंने कई महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

कौन हैं अनीश दयाल सिंह?

अनीश दयाल सिंह एक रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं. पिछले साल रिटायर होने से पहले वह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ के डीजी थे. 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 तक वह इस पद पर रहे. इसके अलावा वो आईटीबीपी के भी डीजी रहे हैं. आईटीबीपी और खुफिया ब्यूरो में उन्होंने लगभग 30 वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जन्मे (1964) अनीश दयाल सिंह ने हैदराबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग ली. अपने करियर के दौरान उन्होंने कई उपलब्धि हासिल की. नक्सलवाद के खिलाफ अभियानों में सीआरपीएफ की भूमिका को मजबूत करना, सीआरपीएफ के 130 से अधिक बटालियनों का पुनर्गठन करना है जैसे काम शामिल हैं.

अनीश दयाल सिंह को मिले हैं कई पुरस्कार

इसके अलावा उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पहले विधानसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने में सीआरपीएफ की भूमिका की भी देखरेख की. अनीश दयाल सिंह को उनके विशिष्ट सेवा के लिए कई पुरस्कार मिले हैं, जिनमें 2004 में मेरिटोरियस सर्विस के लिए भारतीय पुलिस मेडल और 2012 में विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस मेडल शामिल हैं.

जानकारी के मुताबिक, अनीश दयाल सिंह सिंह डिप्टी एनएसए के रूप में जम्मू-कश्मीर, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर उग्रवाद समेत देश के आंतरिक मामलों के प्रभारी होंगे. रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख राजिंदर खन्ना अतिरिक्त एनएसए हैं, जबकि सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी टीवी रविचंद्रन और पूर्व आईएफएस अधिकारी पवन कपूर दो सेवारत डिप्टी एनएसए हैं.

कई अहम पहलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

सीआरपीएफ प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अनीश ने कई अहम पहलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जैसे- नक्सलवाद से निपटने में सीआरपीएफ की प्रगति, तीन दर्जन से अधिक अग्रिम परिचालन अड्डे (फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस) स्थापित करना और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में चार नई बटालियनों की शुरुआत करना. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में पहले विधानसभा चुनावों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने में सीआरपीएफ की भूमिका की भी देखरेख की.

सीआरपीएफ बटालियनों के व्यापक पुनर्गठन की पहल
आंतरिक रूप से अनीश ने 130 से अधिक सीआरपीएफ बटालियनों के व्यापक पुनर्गठन की पहल की. यह आठ वर्षों में इस तरह का पहला पुनर्गठन था, जिसका मकसद परिचालन दक्षता में सुधार और सैनिकों को अधिक पारिवारिक समय प्रदान करना था, जिससे इकाइयों और उनके मूल केंद्रों के बीच की औसत दूरी 1,200 किमी से घटकर 500 किमी हो गई. उन्होंने प्रतिक्रिया एकत्र करने के लिए कंपनी कमांडरों के साथ संवाद सत्र भी शुरू किए, जिसकी बल के भीतर व्यापक रूप से सराहना की गई.

सेवानिवृत्त कर्मियों को मानद रैंक प्रदान करने की मंजूरी के तहत नियुक्ति

यह नियुक्ति केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय सशस्त्र बलों के सेवानिवृत्त कर्मियों को मानद रैंक प्रदान करने की मंजूरी के साथ हुई है. एक ऐसी नीति जिसका अनीश ने समर्थन किया था. इस वर्ष की शुरुआत में गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स के अधीनस्थ अधिकारियों का मनोबल बढ़ाने के उद्देश्य से एक नीति को मंजूरी देते हुए एक आदेश जारी किया था.

स्वयं अनीश ने ही रखा था इस नीति का प्रस्ताव

इस नीति का प्रस्ताव मूल रूप से स्वयं अनीश ने ही रखा था, जिसका मकसद पदोन्नति के अवसरों में लंबे समय से चली आ रही गतिरोध की समस्या को दूर करना था, जहां कुछ कांस्टेबलों को अपनी पहली पदोन्नति के लिए 20 साल तक का इंतजार करना पड़ता है.

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