BrahMos NG Missile : पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस प्रकार से पलटवार किया, उतने में ही पाकिस्तान की हालत खराब हो गई है। लेकिन, अब दुश्मन के दिल को दहलाने के लिए भारत का ब्रम्हास्त्र ‘ब्रह्मोस मिसाइल’ एक नए वर्जन में सामने आ गया है। नाम है ब्रह्मोस एनजी सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल। यह मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल का नेक्स्ट जेनरेशन वर्जन है। इसकी मारक क्षमता तीनों सेनाओं की मारक क्षमता को पांच गुणा तक बढ़ा देगी।
रिपोर्ट के अनुसार, ब्रह्मोस NG (Next generation) का पहली बार निर्माण भारत में किया जा रहा है, जिससे तीनों सेनाओं आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की मारक क्षमता में इजाफा होगा। इतना ही नहीं भारत के पास वर्तमान की ब्रह्मोस मिसाइल (2900 किलोग्राम) की तुलना में यह हल्का होने के साथ ही लागत में भी काफी कम होगी। नए ब्रह्मोस एनजी का वजन 1200 किलो होगा।
लखनऊ में होगा निर्माण
ब्रह्मोस मिसाइल की प्रोडक्शन यूनिट लखनऊ में लगाई गई है। यहीं पर ब्रह्मोस एनजी का निर्माण किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि यह अगले साल तक बनकर तैयार हो जाएगी। डीआरडीओ के एडवाइजर और ब्रह्मोस एयरोस्पेस के एमडी डॉ सुधीर मिश्रा ने बताया कि एनजी तकनीक के कारण इसका वजन घटकर 1260 किलो हो गया है।
ब्रह्मोस एनजी से फायदा
इस तकनीक के इस्तेमाल के बाद सुखोई विमान एक की जगह पांच मिसाइलें लोड की जा सकेंगी। इसकी रेंज मौजूदा मिसाइल की ही तरह 300 किमी की रेंज होगी। इसी प्रकार से थलसेना के मिसाइल सिस्टम पर अब एक साथ तीन की जगह कुल 6 मिसाइलों को लोड किया जा सकेगा। ऐसा ही नोसेना के साथ भी होने वाला है। अगर मौजूदा वक्त की बात करें तो देश में हर साल 80 से 100 मिसाइलों का उत्पादन किया जा रहा है। वहीं एनजी यूनिट में 100-150 मिसाइलें तैयार होने लगेंगी। ऐसे में प्रतिवर्ष करीब 250 मिसाइलें बनाई जाएंगी।
ब्रह्मोस का निर्यातक है भारत
गौरतलब है कि भारत ब्रह्मोस मिसाइल का भारत निर्यात करता है। फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया, अफ्रीका जैसे देशों को भारत ब्रह्मोस मिसाइल का निर्यात करता है। फिलीपींस के 375 मिलियन डॉलर के ऑर्डर को पूरा करने में लखनऊ की यूनिट से भी पूरा किया जाएगा।
भारत में पहली बार बन रही सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस नेक्स्ट जनरेशन (एनजी) तीनों सेनाओं की मारक क्षमता को बढ़ाएगी। वजन और लागत में यह मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल से आधी से भी कम होगी।
लड़ाकू विमान सुखोई में पहले से अधिक मिसाइल को लोड किया सकेगा। सबसे एडवांस तकनीक वाली ब्रह्मोस-एनजी की पहली खेप अगले एक साल में तैयार हो जाएगी। वहीं, मौजूदा इस्तेमाल हो रही पहली ब्रह्मोस मिसाइल तैयार कर ली गई है। इसकी डिलीवरी रविवार को प्रोडक्शन यूनिट के दौरान की जाएगी।