Chaiti Chhath 2026 : राजधानी रांची, पटना समेत अन्य जिलों में आज बुधवार (25 मार्च) चैती छठ के अंतिम दिन लाखों श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके साथ ही चार दिवसीय चैती छठ का महापर्व श्रद्धा और धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। आज के दिन नदी किनारे बने हुए छठ घाट पर भोर के समय से व्रती महिलाएं पूरी निष्ठा भाव से भगवान भास्कर की उपासना करती हैं। रांची के साथ-साथ धनबाद, बोकारो, जमशेदपुर, हजारीबाग और पटना के अलावा गया, मुजफ्फरपुर, वैशाली, छपरा, आरा, भागलपुर, बक्सर में भी हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने नदियों और तालाबों पर जाकर सूर्य की उपासना की और अर्घ्य दिया।
36 घंटे निर्जला व्रत का हुआ समापन
छठ पूजा के चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद छठ व्रतियों ने अपने 36 घंटे के निर्जला व्रत का पारण करके समापन किया। व्रती पानी में खड़े होकर ठेकुआ, गन्ना समेत अन्य प्रसाद सामग्री से सूर्यदेव को अर्घ्य देती हैं और अपने परिवार, संतान की सुख समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। सभी के बीच ठेकुआ प्रसाद का वितरण किया गया। इस साल चैती छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान 22 मार्च रविवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ था।
प्रसाद खाकर पारण करती हैं छठ व्रती
छठ पूजा के बाद व्रती कच्चे दूध का शरबत पीकर या ठेकुआ व किसी अन्य चीज का प्रसाद खाकर अपने व्रत को पूरा करती हैं, जिसे पारण या परना कहा जाता है और इसी के साथ छठ पर्व का समापन हो जाता है। वहीं कुछ महिलाएं अर्घ्य के बाद घर लौटकर पूजा स्थान पर दीप जलाती हैं और परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करती हैं।
चैती छठ 2026 का क्रार्यक्रम
22 मार्च को नहाय-खाय।
23 मार्च को खरना पूजा।
24 मार्च को डूबते सूर्य की उपसना व अर्घ्य।
25 मार्च की सुबह का उगते सूर्य को अर्घ्य और पारण।
क्यों मनाई जाती है छठ पूजा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, छठ पूजा का पर्व सूर्य देव को धन्यवाद देने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। भक्त इस दौरान सूर्य देव की बहन छठी मईया की भी पूजा करते हैं, जो संतान और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना के लिए की जाती है। ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का वास होता है।
