Delimitation 2027 : लोकसभा सीटों के आगामी परिसीमन को लेकर चल रही बहस के बीच प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के एक वर्किंग पेपर ने नया और संतुलित मॉडल प्रस्तावित किया है। इस मॉडल के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 824 करने का सुझाव दिया गया है। खास बात यह है कि मौजूदा 543 सीटों में से 373 सीटों को बिना किसी बदलाव के यथावत रखा जाएगा, जबकि केवल 170 सीटों का पुनर्गठन कर नई सीटें बनाई जाएंगी।
यह वर्किंग पेपर ईएसी-पीएम की सदस्य डॉ. शमिका रवि और भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) के प्रो. मुदित कपूर द्वारा तैयार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 59 लोकसभा क्षेत्रों को दो हिस्सों और 111 क्षेत्रों को तीन हिस्सों में विभाजित कर कुल 281 नई सीटें सृजित की जा सकती हैं।
केवल जनसंख्या नहीं, कई मानकों पर होगा परिसीमन
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि परिसीमन का आधार केवल जनसंख्या नहीं होगा। इसके लिए कई सामाजिक और प्रशासनिक मानकों को शामिल करने का सुझाव दिया गया है, जिनमें शामिल हैं…..
•• संसदीय क्षेत्र का आकार
•• शहरीकरण का स्तर
•• अनुसूचित जाति (SC) आबादी
•• अनुसूचित जनजाति (ST) आबादी
••भाषाई विविधता
•• मतदान केंद्रों की उपलब्धता
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतिनिधित्व अधिक प्रभावी और संतुलित होगा।
उत्तर-दक्षिण विवाद का समाधान तलाशने की कोशिश
दक्षिण भारतीय राज्यों में लंबे समय से यह आशंका रही है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है। हालांकि, प्रस्तावित मॉडल इस चिंता को काफी हद तक दूर करता दिखाई देता है।
रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल की लोकसभा में हिस्सेदारी 23.7 प्रतिशत से मामूली घटकर 23.6 प्रतिशत रह जाएगी। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों की हिस्सेदारी भी 45.6 प्रतिशत से घटकर 45.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को सबसे ज्यादा फायदा
प्रस्तावित मॉडल में कई राज्यों की सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि की सिफारिश की गई है।
राजस्थान
••वर्तमान सीटें: 25
••प्रस्तावित सीटें: 38
••नई सीटें: 13
••संभावित पुनर्गठन: जयपुर, जयपुर ग्रामीण, सीकर, जोधपुर, उदयपुर, चूरू और बांसवाड़ा
मध्य प्रदेश
• वर्तमान सीटें: 29
•• प्रस्तावित सीटें: 44
•• नई सीटें: 15
••संभावित पुनर्गठन: इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, भिंड, धार, रतलाम, बालाघाट और मंडला
छत्तीसगढ़
••वर्तमान सीटें: 11
••प्रस्तावित सीटें: 17
••नई सीटें: 6
••संभावित पुनर्गठन: सरगुजा, कांकेर और दुर्ग
छोटे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भी मिलेगा लाभ
रिपोर्ट में मिजोरम, सिक्किम, नागालैंड, लद्दाख, चंडीगढ़, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार जैसे छोटे राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की लोकसभा सीटों को दोगुना करने का सुझाव दिया गया है, ताकि वहां भी बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।
2027 की जनगणना बने आधार
वर्किंग पेपर में सुझाव दिया गया है कि अगला परिसीमन 2027 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर किया जाए। रिपोर्ट का दावा है कि नए मॉडल के लागू होने पर मतदान प्रतिशत में लगभग 2.3 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है।
क्या है इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत?
इस प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह परिसीमन को केवल जनसंख्या वृद्धि तक सीमित नहीं रखता, बल्कि मतदाताओं की संख्या, सामाजिक जटिलताओं, शहरीकरण और प्रशासनिक जरूरतों को भी महत्व देता है। इससे उत्तर और दक्षिण भारत के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को बनाए रखते हुए लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।