Indian Army : जब कभी भारत की धरती पर प्रकृति का कहर टूटा है-भीषण बाढ़, पहाड़ ढहना, गांव-शहरों का संपर्क टूटना-तब-तब हमारे वीर जवान निस्वार्थ भाव से मानवता की सेवा में डटकर खड़े हुए हैं।
जो अभी कुछ पखवारे पहले तक पाकिस्तान से सीमाओं पर मोर्चा ले रहे थे, वही अब भीषण बाढ़ में अभूतपूर्व साहस, कर्तव्यपरायणता और संवेदनशीलता का परिचय दे रहे हैं।
जब मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने जम्मू-कश्मीर,हिमाचल प्रदेश और पंजाब को अपनी चपेट में ले लिया तो भारतीय सशस्त्र सेनाओं ने तुरंत व्यापक मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान शुरू कर दिया।
47 सैन्य टुकड़ियों को तत्काल तैनात किया गया, जिसमें सेना विमानन इकाइयां और भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर आधारित यूनिट शामिल थे। इंजीनियर, चिकित्सा और संचार संसाधन भी राहत कार्यों के लिए तैनात किए गए ताकि पीड़ित लोगों को तत्काल सहायता प्रदान की जा सके।
गुरदासपुर के लस्सियां क्षेत्र में तीन चीता हेलीकॉप्टरों ने अत्यंत विषम मौसमी परिस्थितियों में कई उड़ानें भरकर 27 लोगों को सफलतापूर्वक निकाला। पठानकोट में सेना एविएशन ने एक अत्यधिक जोखिम भरा हेलीकॉप्टर बचाव अभियान चलाकर बाढ़ के पानी से घिरी एक ऐसी इमारत से नागरिकों और CRPF कर्मियों को निकाला जो ढहने के कगार पर थी, जो बचाव के चंद मिनटों बाद ही ढह गई।
फिरोजपुर में सतलुज नदी के बढ़ते जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए सेना ने 45,000 रेत की बोरियों से तटबंध बनाकर शहर को डूबने से बचाया। कपूरथला में ब्यास नदी के पानी से घिरे गांवों में सेना की नौकाओं के माध्यम से लोगों तक आवश्यक सामग्री जैसे राशन, पानी, पका हुआ भोजन, ड्राई फूड और दूध के पैकेट पहुंचाए गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 8 से 9 फीट तक पानी भरा था, लेकिन इससे सैनिकों के हौसले पस्त नहीं हुए।
भारतीय वायु सेना ने उत्तरी क्षेत्र में निकटवर्ती ठिकानों से पांच MI-17 हेलीकॉप्टर और एक चिनूक हेलीकॉप्टर तैनात किया है। डेरा बाबा नानक, पठानकोट और अखनूर सेक्टरों में जलमग्न क्षेत्रों से भारतीय सेना तथा सीमा सुरक्षा बल के कर्मियों सहित फंसे हुए नागरिकों को निकालने के लिए 55 से अधिक उड़ानें संचालित की गईं।
इन राहत अभियानों के दौरान अब तक 5,000 से अधिक नागरिकों और 300 अर्धसैनिक बलों के जवानों को जलमग्न क्षेत्रों से बचाया गया है। लगभग 41 टन राहत सामग्री जिसमें भोजन के पैकेट, दवाइयां और आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं, जमीन पर और हवाई मार्ग से दुर्गम गांवों तक पहुंचाई जा चुकी हैं।
जबकि हमेशा की तरह “कंजड़ी लाल” ने अपनी विफलता को ढकने के लिए बोलना शुरू कर दिया है कि मोदी राहत सामग्री पंजाब ना भेज कर अफगानिस्तान भेज रहे हैं।
हवाई सहायता के लिए 20 विमानों को सेवा में लगाया गया है जिनमें तीन उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर, दस टोही और अवलोकन हेलीकॉप्टर, छह MI-17 और एक चिनूक शामिल हैं। सेना के वाहन, नावें और ख़ास ऑल टेरेन व्हीकल (ATV) तैनात कर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया।
चुनौतियों का सामना करते हुए, सैनिकों को भारत-पाकिस्तान सीमा के पास भी उड़ान भरनी पड़ी, जिसके लिए दोनों देशों के बीच हवाई गतिविधि के बारे में जानकारी साझा करनी पड़ी। सीमा पर लगी बाड़ को भी नुकसान पहुंचा, लेकिन सैनिकों ने अपना कर्तव्य निरंतर जारी रखा।
प्राकृतिक आपदा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती रही बुनियादी ढाँचे का टूटना-पुल बह गये, सड़कें गायब हो गईं, गाँवों का संपर्क बाकी दुनिया से कट गया। परंतु सेना इंजीनियरों ने असंभव को संभव बना दिया।
जम्मू के तवी नदी पर बाढ़ में बह गए सभी चार पुलों के बाद सेना की टाइगर डिवीजन ने महज 12 घंटे में 110 फीट लंबा बेली ब्रिज बनाकर यातायात बहाल कर दिया।
रसद और राहत पहुँचाने के लिए पहाड़ी इलाकों, डूबे हुए इलाकों और नदी के किनारे तूफानी रफ्तार से अस्थायी सड़कें व रास्ते बनाए गए। उत्तराखंड और हिमाचल में भी सेना ने रातोंरात बेली ब्रिज, अस्थायी सड़कें और राहत शिविर खड़े किए, जिससे घिरे गाँवों तक खाना, दवा और डॉक्टर समय पर पहुँच सकें।
एक अन्य प्रेरणादायक घटना लद्दाख में घटित हुई जहां सेना के ALH ध्रुव हेलीकॉप्टर ने रात के अंधेरे में 17,000 फीट की ऊंचाई पर एक जोखिम भरा रेस्क्यू ऑपरेशन अंजाम दिया। कोंगमारुला दर्रे में फंसे दो दक्षिण कोरियाई पर्वतारोहियों को बचाने के लिए बिना हेलीपैड और रोशनी के नाइट विजन गॉगल्स की सहायता से बचाव दल ने सटीक लैंडिंग किया। यह ऑपरेशन सेना के असाधारण उड़ान कौशल और परिस्थितियों की गहरी समझ का प्रमाण था। यह घटना इस वीडियो में देखा जा सकता है।
इस समर्पण के बीच दुख का विषय यह है कि अनेक बार सैनिकों के साथ दुर्व्यवहार, अपमान या मारपीट की खबरें आती हैं। वे वही जवान हैं, जो संकट में अपनी जान जोखिम में डालकर उसी जमीन के नागरिकों की सुरक्षा के लिए दिन रात तैनात हैं। किसी भी सैनिक का अपमान पूरे राष्ट्र का अपमान है—यह अत्यंत पीड़ादायक और शर्मनाक है। ऐसा कोई भी कृत्य हिंदुस्तान की संस्कृति और कर्तव्यबोध के विपरीत है।
आज और हमेशा से, देश के वीर सपूत राष्ट्र की रक्षा के अलावा hr6 आपदा में जनता को जीवनदान देते रहे हैं, यह हर नागरिक का कर्तव्य है कि हर सैनिक के प्रति आदर, कृतज्ञता और पूर्ण सम्मान का भाव रखे। सेना का हर जवान, हर आपदा में, बिना भेदभाव के मानवता का प्रहरी है—उन्हें सम्मान देना, सुरक्षा देना और उनके योगदान की सराहना करना हम सबका धर्म है।
