Jammu Kashmir : 25 विधायकों की बगावत! क्या गिर जाएगी उमर अब्दुल्ला की सरकार?

Bindash Bol

* जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार गिरने का खतरा: 25 विधायकों ने मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम दिया, नहीं मानीं तो आज ही इस्तीफा दे सकते हैं

* उमर अब्दुल्ला के खिलाफ बगावत की तैयारी… 25 विधायकों की 5 मांगें और 14 दिन का अल्टीमेटम, क्या गिरेगी जम्मू-कश्मीर सरकार?

Jammu Kashmir : जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की निजी जिंदगी में जहां शादी के बाद खुशियों का नया दौर शुरू हुआ है, वहीं राजनीतिक मोर्चे पर उनकी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. सरकार के भीतर बढ़ती नाराजगी ने उनके लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है. पार्टी के कई विधायक लगातार बैठकें कर रहे हैं और नेतृत्व के सामने अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. इसी बीच चर्चा है कि शुक्रवार को असंतुष्ट विधायक पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात कर सकते हैं. इस संभावित बैठक में खुद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के भी शामिल होने की अटकलें हैं.

विधायकों ने दिया 14 दिन का अल्टीमेटम

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 25 नाराज विधायकों ने पार्टी नेतृत्व को 14 दिन का समय दिया है. साथ ही चेतावनी दी है कि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे सरकार से समर्थन वापस लेने का कदम उठा सकते हैं. ऐसे में उमर अब्दुल्ला के सामने एक तरफ सरकार को स्थिर रखने और दूसरी तरफ पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है. नेशनल कॉन्फ्रेंस का शीर्ष नेतृत्व पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी को दूर करने में जुटा है. इसी प्रयास के तहत शुक्रवार को असंतुष्ट विधायकों की पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के साथ मुलाकात हो सकती है. इस बीच ईदगाह से विधायक मुबारक गुल को बैठक में शामिल नहीं किए जाने को लेकर भी पार्टी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली थी. उनके समर्थन में कई कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया था. इससे पहले मुबारक गुल के बुधवार को मीडिया के सामने अपनी बात रखने की चर्चा थी, लेकिन शुक्रवार को प्रस्तावित बैठक को देखते हुए इस कार्यक्रम को फिलहाल टाल दिया गया.

कब शुरू हुई थी विधायकों कि नाराज़गी?

पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति 27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पैदा हुई थी. इस विस्तार में कई अनुभवी विधायकों को जगह नहीं मिली, जिसके बाद उनकी नाराजगी खुलकर सामने आने लगी. ईदगाह के विधायक मुबारक गुल ने भी इस फैसले पर असहमति जताई थी. उनके समर्थकों ने श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. हालांकि, घटनाक्रम के कुछ ही समय बाद गुल को पार्टी महासचिव की जिम्मेदारी सौंप दी गई. मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार विधायकों अली मोहम्मद सागर, मीर सैफुल्ला, शमीमा फिरदौस और अल्ताफ अहमद वानी (कालू) को मंत्री बनाया गया था. लेकिन इस फैसले से पार्टी के कई वरिष्ठ नेता खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे. छह बार विधायक रह चुके और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल के अलावा अब्दुल मजीद लारमी ने भी मंत्री पद नहीं मिलने पर सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी.

विधायकों ने रखी हैं पांच मांग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, असंतुष्ट विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने पांच प्रमुख शर्तें रखी हैं. इनमें मंत्रिमंडल का नए सिरे से गठन, मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार को पद से हटाना और अनुच्छेद 370 की बहाली के मुद्दे पर केंद्र सरकार पर दबाव बनाने जैसी मांगें शामिल हैं. इसके अलावा, सरकारी नियुक्तियों से पहले सभी संबंधित नेताओं से सलाह लेने और मौजूदा मंत्रियों को हटाने की बात भी कही जा रही है. हालांकि, इन मांगों की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक पत्र या सार्वजनिक बयान अब तक सामने नहीं आया है. विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं और नेशनल कॉन्फ्रेंस कांग्रेस सहित अन्य दलों के समर्थन से सरकार चला रही है. ऐसे में यदि पार्टी के 25 विधायक अलग राह अपनाते हैं, तो नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास विधायकों की संख्या घटकर 16 रह जाएगी. इससे सरकार के सामने राजनीतिक और संख्याबल से जुड़ी बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है.

मेहदी और CM अब्दुल्ला में तनातनी

अगा रुहुल्लाह मेहदी और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बीच मतभेद पहले भी कई मौकों पर सामने आ चुके हैं. मेहदी लगातार नेशनल कॉन्फ्रेंस पर चुनाव के दौरान किए गए अहम वादों को पूरा न करने का आरोप लगाते रहे हैं. अब उनके इस्तीफे की अटकलों के बीच माना जा रहा है कि यह कदम जम्मू-कश्मीर की  राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है. हाल ही में समर्थकों के बीच दिए गए करीब 80 मिनट के भाषण में भी उन्होंने अलग राजनीतिक दल बनाने की संभावना के संकेत दिए थे. हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस दिशा में कोई फैसला कब तक लिया जा सकता है. दूसरी ओर, असंतुष्ट विधायकों की ओर से बताई जा रही मांगों को लेकर अब तक किसी नेता ने आधिकारिक दस्तावेज या लिखित बयान जारी नहीं किया है. गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल 90 सीटें हैं और नेशनल कॉन्फ्रेंस कांग्रेस सहित अन्य दलों के समर्थन से सरकार चला रही है. यदि पार्टी के 25 विधायक अलग हो जाते हैं, तो एनसी के पास केवल 16 विधायक रह जाएंगे, जिससे सियासी स्थिति और जटिल हो सकती है.
बहरहाल,  नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर जारी खींचतान ने उमर अब्दुल्ला सरकार की चुनौतियां बढ़ा दी हैं. अब सबकी नजर शुक्रवार को होने वाली संभावित बैठक पर टिकी है. यह मुलाकात तय कर सकती है कि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट विधायकों को मनाने में कितना सफल होता है या फिर जम्मू-कश्मीर की राजनीति में कोई नया मोड़ आने वाला है.

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