Mamata Banerjee : बंगाल उपचुनाव से पहले TMC को बड़ा झटका…. ममता और ऋतब्रत गुट के नाम व चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक

Bindash Bol

Mamata Banerjee :पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अंदरूनी कलह अब चुनाव आयोग की चौखट तक पहुंच गई है। आगामी विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले चुनाव आयोग ने एक कड़ा अंतरिम आदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी—दोनों ही गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित चुनाव चिह्न (दो फूल और घास) का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।

मुख्य बिंदु: क्या है पूरा मामला?

* ​उपचुनावों के लिए रोक: यह प्रतिबंध फिलहाल केवल नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले आगामी उपचुनावों के लिए लागू किया गया है।

* ​नए नाम और सिंबल की मांग: आयोग ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपनी अलग पहचान के लिए 3-3 नए नाम और 3-3 मुफ्त (फ्री) चुनाव चिह्नों के विकल्प प्राथमिकता के आधार पर जमा करें।

* ​समय सीमा: दोनों गुटों को अपने इन विकल्पों को आज (18 सितंबर 2026) सुबह 11 बजे तक आयोग के सामने प्रस्तुत करना था, जिसके आधार पर उन्हें नए नाम और सिंबल आवंटित किए जाएंगे। हालांकि, नए नाम में मूल पार्टी से जुड़ाव तो दिखाया जा सकता है, लेकिन सीधे तौर पर मूल नाम का इस्तेमाल नहीं होगा।

दोनों पक्षों का पक्ष

* ​ममता गुट का विरोध: ममता बनर्जी के प्रतिनिधिमंडल (डेरेक ओ’ब्रायन, कल्याण बनर्जी, महुआ मोइत्रा और सागरिका घोष) ने इस अंतरिम आदेश को ‘आधारहीन’ बताया है। उनका तर्क है कि पार्टी के संविधान के तहत अगला संगठनात्मक चुनाव 31 जनवरी 2027 तक होना है।

* ​ऋतब्रत गुट की दलील: दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी और उनके समर्थकों (चंद्रिमा भट्टाचार्य, अकरुल जमान, अरूप रॉय आदि) ने आयोग के सामने अपनी बात रखते हुए जल्द फैसला लेने का अनुरोध किया, क्योंकि उपचुनाव नजदीक हैं और नामांकन दाखिल किए जा चुके हैं।

विवाद की जड़ और आगे की राह

​यह पूरा विवाद 22 जून के बाद तब गहराया जब ऋतब्रत बनर्जी ने बागी नेताओं की बैठक बुलाकर एक नई राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का ऐलान किया था।
​चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल एक अंतरिम व्यवस्था है। पार्टी के नाम और स्थायी चुनाव चिह्न पर असली हक किसका होगा, इसकी लंबी कानूनी लड़ाई Symbols Order 1968 के पैरा 15 के तहत आगे भी जारी रहेगी।
​फिलहाल, 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनावों में दोनों गुटों को नए नाम और नई पहचान के साथ ही मैदान में उतरना होगा।

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