Mark Zuckerberg apologies : मार्क जकरबर्ग ने विवाद के बीच मांगी माफी, बोले- कंटेंट बूस्ट करने के लिए मिले थे पैसे

Bindash Bol

* Meta ने छात्र आंदोलन के समय पेड 180 इनफ्लुएंसर के आपत्तिजनक कंटेंट को इंडिया में फैलाया

* डीप फेक कंटेंट और आपत्तिजनक कंटेंट भारत में प्रमोट किया

* भारी मात्रा में पैसा लेकर 180 इनफ्लुएंसर के कंटेंट को इंडिया में प्रमोट किया

* Meta ने माना बहुत सारे गैर कानूनी कंटेंट भारत में प्रमोट किया गया

* खासकर ऑडियंस के लिए पेड प्रमोशंस किया गया था

* इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़े यौवन शोषण से संबंधित वीडियो को प्रसारण

* पीएम मोदी के फेसबुक पोस्ट  जानबूझकर हटाया गया

Mark Zuckerberg apologies :  Meta के CEO मार्क जकरबर्ग ने प्लेटफॉर्म पर चाइल्ड सेक्सुअल अब्यूज मटेरियल (CSAM), डीपफेक कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी कमियों को लेकर माफी मांगी है. उन्होंने माना कि प्लेटफॉर्म पर कुछ मामलों में गलतियां हुईं और इसके लिए अफसोस भी जताया. साथ ही उन्होंने कहा कि Meta इन कमियों को दूर करने और प्लेटफॉर्म को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए जरूरी कदम उठाएगा. इस दौरान ये भी क्लीयर किया गया कि Meta को केवल एक मध्यस्थ (Intermediary) मानकर पूरी कानूनी सुरक्षा नहीं दी जा सकती, क्योंकि कंपनी ये तय करने में भूमिका निभाती है कि कौन-सा कंटेंट किस यूजर तक पहुंचे.

इसी वजह से आईटी एक्ट के तहत मिलने वाली ‘सेफ हार्बर’ सुरक्षा इस मामले में ऑटोमैटिकली लागू नहीं मानी जाती है. Meta ने ये भी एक्सेप्ट किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट की पहुंच बढ़ाने के लिए बड़े लेवल पर पैसा खर्च किया गया था.

मेटा को दिया गया था अल्टीमेटम

ये मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित एक वीडियो कुछ घंटों के लिए Facebook से हटाए जाने को लेकर Meta पहले से विवादों में है. इस मुद्दे पर संसद की स्थायी समिति ने सख्त रुख अपनाते हुए मार्क जकरबर्ग से जवाब और माफी मांगी है. लोकसभा सचिवालय ने इस संबंध में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को भी लेटर भेजा था. हालांकि अब जकरबर्ग ने पोस्ट हटाने के मामले में माफी मांग ली है.

क्या है पूरा मामला?

ये मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो से जुड़ा हुआ है जिसे Facebook से करीब 5 से 6 घंटे के लिए हटा दिया गया था. इस वीडियो में प्रधानमंत्री स्टूडेंट्स और यंगस्टर्स को संबोधित करते हुए परीक्षा विवाद और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई के बारे में बात कर रहे थे. वीडियो हटाए जाने के बाद इस पर सवाल उठे और अब ये मामला संसद तक पहुंच गया है.

संसदीय समिति ने क्या कहा?
संसद की स्थायी समिति ने इस पूरे मामले को काफी सीरियस मैटर बताया है. समिति का कहना है कि देश के प्रधानमंत्री के ऑफिशियल संबोधन से जुड़े वीडियो को हटाना कोई नॉर्मल मामला नहीं हो सकता है. इसलिए Meta को इस पर क्लीयर जवाब देना चाहिए और पब्लिकली माफी मांगनी चाहिए.

MeitY सचिव को भेजा गया पत्र

लोकसभा सचिवालय की तरफ से इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव को एक ऑफिशियल लेटर भेजा गया है. लेटर पर लोकसभा सचिवालय की निदेशक A. Jyothirmayi के साइन हैं. पत्र में कहा गया है कि Meta से इस मामले में जवाब लिया जाए और तीन दिनों के अंदर उचित कार्रवाई की जाए.

तीन दिन में माफी नहीं मिली तो क्या?

समिति ने कहा है कि अगर Meta के CEO मार्क ज़करबर्ग की तरफ से तीन दिनों के अंदर माफी नहीं आती है तो कंपनी को भारत में मिली कानूनी सुरक्षा (Legal Immunity/Protection) वापस लेने के ऑप्शन पर विचार किया जा सकता है. हालांकि इस पर अंतिम फैसला संबंधित कानूनी प्रोसेस और सरकार के लेवल पर ही लिया जाएगा.

अब आगे क्या?

इस मामले को लेकर सरकार ने सख्त रुख बनाए रखा है और MeitY मंत्री ने Meta के अधिकारियों को कल फिर से तलब किया है, जहां उनसे इस पूरे मामले पर और जवाब मांगा जाएगा.

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