Masood Azhar :आतंकवाद के ग्लोबल मंच पर पाकिस्तान का पुराना नाटक एक बार फिर से शुरू हो चुका है! इस बार स्क्रिप्ट में नया ट्विस्ट यह है कि पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी (FIA) ने अपनी नई ‘रेड बुक’ में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना और ग्लोबल आतंकी मसूद अजहर पर इनाम की राशि बढ़ाकर 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी है और उसे ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया है।
लेकिन, जरा रुकिए! क्या यह वाकई आतंकवाद के खिलाफ कोई कड़ा एक्शन है या फिर दुनिया की आंखों में धूल झोंकने का एक और घटिया ड्रामा? आइए जानते हैं इस पूरी कहानी की असली परतें।
50 लाख से बढ़कर 70 लाख: भाव बढ़ गया या नीयत बदली?
साल 2021 में पाकिस्तान ने मसूद अजहर पर 50 लाख रुपये का इनाम रखा था और दावा किया था कि वह अफगानिस्तान भाग चुका है।
* पाकिस्तानी दावा: मसूद अजहर हमारे देश में नहीं है।
* भारतीय खुफिया एजेंसियों का सच: पिछले छह महीनों के तकनीकी विश्लेषण बताते हैं कि मसूद अजहर कहीं नहीं भागा, बल्कि वह पाकिस्तान के सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में पूरी सुरक्षा के साथ छिपा हुआ है।
अब 5 साल बाद इनाम को 50 लाख से बढ़ाकर 70 लाख करना सिर्फ एक कागजी खानापूर्ति है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह दिखाया जा सके कि पाकिस्तान आतंकवाद पर गंभीर है।
FATF का डर और बचावकियारत की सियासत
पाकिस्तान की इस हरकत के पीछे का सबसे बड़ा कारण है—वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (FATF) की पूर्ण बैठक।
पाकिस्तान पर हमेशा से आतंकवाद को फंडिंग देने और अपनी धरती का इस्तेमाल सीमा पार हमलों के लिए होने देने के आरोप लगते रहे हैं। जब भी FATF की तलवार गर्दन पर लटकती है, पाकिस्तान ऐसे ‘मोस्ट वांटेड’ ड्रामे रचने लगता है।
चौंकाने वाले आंकड़े….
पाकिस्तान की रेड बुक में वांटेड आतंकियों की संख्या 2021 में 1,330 थी, जो अब बढ़कर 1,804 हो चुकी है (लगभग 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी)। लेकिन इन सूचियों के बढ़ने के बावजूद जमीन पर एक भी आतंकी सलाखों के पीछे नहीं पहुंचता!
मुंबई हमले (26/11): नाम हैं, सबूत गायब!
पाकिस्तान की नई रेड बुक में 26/11 मुंबई हमले से जुड़े 19 आतंकियों के नाम भी शामिल हैं। लेकिन चालाकी देखिए….
* मोहम्मद खान और अब्दुल रहमान के नाम तो सूची में हैं, लेकिन उनकी तस्वीरें, लश्कर-ए-तैयबा से उनके संबंध और हमले में उनकी भूमिका से जुड़े सारे सबूत गायब कर दिए गए हैं!
* जो आतंकी हमलों के लिए वीओआईपी (VOIP) संपर्क या चंद हजार रुपये की फंडिंग देने के आरोपी हैं, वे पिछले 18 वर्षों से पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं।
कार्रवाई या सिर्फ ‘आईवॉश’?
रक्षा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि कागजों पर नाम चढ़ाना और इनाम की घोषणा करना तब तक बेमानी है, जब तक उन आतंकियों की गिरफ्तारी और ठोस कानूनी कार्रवाई न हो।
पाकिस्तान का यह नया कदम आतंकवाद के खात्मे का नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने और वैश्विक मंचों को गुमराह करने का एक पुराना और घिसा-पिटा हथकंडा मात्र है।
क्या आपको लगता है कि पाकिस्तान कभी अपनी जमीन पर पलने वाले इन आतंकियों के खिलाफ कोई वास्तविक और निर्णायक कदम उठाएगा?
