* खतरनाक तूफान मुरासु बस आने वाला है, कुछ घंटे ही बाकी; कहां मचेगी तबाही
Murasu : चक्रवाती तूफान अर्नब की तबाही से उबरने की कोशिश कर रहे तटीय राज्यों पर अब एक और तूफान का खतरा मंडराने लगा है। बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान मुरासु ओडिशा, आंध्र प्रदेश समेत चार राज्यों को झकझोर सकता है। एक हफ्ते के भीतर बंगाल की खाड़ी में यह दूसरा चक्रवाती तूफान है।
जीवन में पहली बार युद्ध के नगाड़े बजेंगे। मुहावरे में कहा जा सकता है कि सिर पर बजेंगे। जी हां, चक्रवाती तूफान मुरासु आज आधी रात में या उसके बाद किसी समय आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से नरसापुर के बीच में किसी जगह पर तट से टकराएगा। इस दौरान 110 की रफ्तार वाली तेज हवाएं चल सकती हैं। हवा के झोंको की रफ्तार 120 तक भी पहुँच सकती हैं। जमकर बारिश होगी।
इस समय नेल्लोर में रात से ही बारिश हो रही है। तूफान के समय क्या होगा। हां, ये बहुत चिंता की बात है कि इतने कम समय में ही बंगाल की खाड़ी में दो बड़े तूफान बन गए। इसके पीछे मुनाफा संचालित मानवता ही है। इस बार के तूफान को भारत ने नाम दिया है, मुरासु । तमिल में इसका मतलब है युद्ध के नगाड़े।
मुरासु के तीन नवंबर की सुबह आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच टकराने की आशंका है। इस दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, तूफान के असर से आंध्र, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी बारिश भी हो सकती है।
ऊंची लहरें उठेंगी
आईएमडी के अनुसार, मुरासु के तट से टकराते समय समुद्र में करीब एक मीटर ऊंची तूफानी लहरें उठ सकती हैं। इससे आंध्र प्रदेश के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा है। भारत ने इस तूफान को मुरासु नाम दिया है। खबरें हैं कि इसके चलते चेन्नई और तिरुवल्लूर में स्कूल बंद कर दिए गए हैं।
ओडिशा में हाई अलर्ट
ओडिशा सरकार ने मुरासु से निपटने की तैयारियां तेज कर दी हैं। आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने कहा कि हाई अलर्ट जारी किया गया है। निचले इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का आदेश दिया है। अर्नब के कारण गंजाम और गजपति जिलों में पहले से ही बचाव कार्य जारी है।
दक्षिणी ओडिशा के कुछ जिलों में विद्यालयों और महाविद्यालयों को तीन नवंबर तक बंद रखने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने ओडिशा में बाढ़ की स्थिति का हवाई सर्वेक्षण किया और प्रभावित लोगों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की। उन्होंने कहा, ‘दक्षिणी ओडिशा में बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार को 50 किलोग्राम चावल और 2,500 रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा फसलों, मकानों और आजीविका को हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाएगी।’
अर्नब तूफान ने ली 6 लोगों की जान
ओडिशा में चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण जान गंवाने वालों की संख्या रविवार को बढ़कर छह हो गई, जबकि 10 लोग अब भी लापता हैं। इस बीच, राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है और चक्रवात ‘मुरासु’ से निपटने की तैयारियां भी तेज कर दी हैं, जिसके तीन नवंबर को पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की संभावना है।
दो मोर्चों पर तैयारियां जारी
विशेष राहत आयुक्त राजेश पी पाटिल ने बताया कि 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट से टकराए चक्रवात ‘अर्नब’ और उसके बाद आई बाढ़ से ओडिशा में करीब 1.18 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। इस आपदा से 75,388 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है और 1,672 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि चक्रवात ‘मुरासु’ के करीब आने के मद्देनजर सरकार दो मोर्चों पर काम कर रही है। पहला, चक्रवात ‘अर्नब’ से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना और उन्हें बचाना तथा दूसरा, आने वाली आपदा से निपटने की तैयारी करना है।
पाटिल ने कहा, ‘भूस्खलन राज्य के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। चक्रवात ‘अर्नब’ के दौरान भूस्खलन की कम से कम 10 घटनाएं हुई हैं।’ उन्होंने कहा, ‘राहत और पुनर्वास का काम युद्धस्तर पर जारी है। चक्रवात ‘अर्नब’ और उसके बाद आई बाढ़ से गंजाम एवं कंधमाल जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।’