Navratri : सनातन परंपरा में नवरात्रि के तीसरे दिन देवी दुर्गा के तीसरे स्वरूप यानि मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है. इस दिन देवी के साधक जप, व्रत आदि नियमों का पालन करते हुए मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से पूजा करते हैं. देवी चंद्रघंटा के माथे पर आधे चंद्रमा के आकार का घंटा लटका है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है. हिंदू मान्यता के अनुसार देवी चंद्रघंटा का स्वरूप मनोरम और शांतिप्रद है. मां चंद्रघंटा की नवरात्रि के तीसरे दिन पूजा करने से व्यक्ति को दिव्य वस्तुओं की प्राप्ति होती है. आइए माता चंद्रघंटा की पूजा की विधि और मंत्र के बारे में विस्तार से जानते हैं.
मां चंद्रघंटा की पूजन सामग्री
- मां चंद्रघंटा की मूर्ति या चित्र
- घी, पवित्र जल (गंगाजल), दूध और शहद
- फूल (विशेषकर पीले और चमेली के), सिंदूर और चंदन
- धूप, दीप और घंटा
- मिठाइयां (खीर, दूध से बनी मिठाइयां)
- 5 तरह के फल
- नारियल, पान और पान जैसे प्रसाद
पूजा विधि
- सुबह स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
2 मां चंद्रघंटा का ध्यान और स्मरण करें।
3 माता चंद्रघंटा की मूर्ति को लाल या पीले कपड़े पर रखें।
4 मां को कुमकुम और अक्षत का लगाएं।
5 मां चंद्रघंटा को पीला रंग अर्पित करें।
6 मां चंद्रघंटा को मिठाई और दूध से बनी खीर चढ़ाएं।
7 पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करें।
8 दुर्गा सप्तशती और चंद्रघंटा माता की आरती का पाठ करें।
मां चंद्रघंटा पूजा मंत्र
पिण्डजप्रवरारूढ़ा ण्डकोपास्त्रकेर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नम:।।
मां चंद्रघंटा की पूजा का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार मां चंद्रघंटा की पूजा भय को दूर करने और साहस की प्राप्ति के लिए की जाती है. मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की पूजा करने से साधक को अपने शत्रुओं पर विजय पाने का आशीर्वाद मिलता है. नवरात्रि के तीसरे की यह पूजा सभी बाधाओं को दूर करे सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने वाली मानी गई है.
