मनोज कुमार
President Donald J. Trump : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जेफ्री क्रुज़ को उनके पद से हटा दिया है। यह फैसला बीते शुक्रवार, 22 अगस्त 2025 को लिया गया, जो हाल के वर्षों की सबसे चौंकाने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा घटनाओं में से एक है।
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने उनके साथ दो अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को भी बर्खास्त कर दिया है।
रक्षा खुफिया एजेंसी (DIA) की एक ताज़ा खुफिया रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि जून 2025 में अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सिर्फ कुछ महीनों के लिए ही पीछे धकेला जा सका है। यह रिपोर्ट डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों के बिल्कुल उलट थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को “पूरी तरह तबाह” कर दिया और ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बर्बाद हो गया है।
DIA ने अपने रिपोर्ट में कहा —
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी हमलों का आकलन करते हुए पाया गया कि फोर्डो,नतांज और इस्फहान जैसे तीन प्रमुख ठिकानों पर बंकर-बस्टर बमों से जबरदस्त हमला हुआ, जिससे उनके प्रवेश द्वार जरूर ध्वस्त हो गए, लेकिन भूमिगत संरचनाएं और अधिकांश सेंट्रीफ्यूज बची रहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने हमलों से ठीक पहले अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को दूसरी जगह शिफ्ट कर लिया था, जिससे उनकी परमाणु क्षमताएं प्रभावित नहीं हुईं। अमेरिकी विशेषज्ञों ने चेताया है कि ऐसी स्थिति में ईरान सैद्धांतिक रूप से परमाणु हथियार निर्माण का रास्ता तेज़ी से पकड़ सकता है।
इस रिपोर्ट के लीक होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप और प्रशासन ने अपनी ही रक्षा खुफिया एजेंसी पर फर्जी रिपोर्टिंग और “राष्ट्रहित के खिलाफ काम करने” का आरोप लगाया। ट्रम्प ने DI के निष्कर्षों को ‘गलत’ बताया और अपनी ही बात पर अड़े रहे कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम “पूरी तरह खत्म” कर दिया गया है।
यह ठीक वैसा ही दावा था जो वो लगातार करते आये हैं कि भारत पाकिस्तान में उनकी वज़ह से युद्धविराम हुआ था वर्ना पाकिस्तान भारत पर परमाणु हमला कर देता।
सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी के वरिष्ठ डेमोक्रेटिक सदस्य मार्क वॉर्नर ने कहा, “यह बर्खास्तगी इस बात को दिखाती है कि ट्रंप प्रशासन खुफिया एजेंसी का उपयोग राष्ट्रहित के बजाय वफादारी की परीक्षा के लिए कर रहा है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक है।”