Saharanpur : सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में शनिवार को जब हुकूमत का बुलडोज़र गरजा, तो सिर्फ़ एक अनधिकृत ढांचे की दीवारें ही नहीं गिरीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में बयानों का ऐसा तूफ़ान उठ खड़ा हुआ जिसकी गूंज अब लखनऊ तक सुनाई दे रही है। कोर्ट के आदेश का हवाला देकर प्रशासन ने सरकारी ज़मीन पर तने निर्माण को ज़मींदोज़ क्या किया, विपक्ष ने सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया। लेकिन इस सियासी तकरार के बीच असली सनसनी तब फैली, जब मलबे के नीचे से एक गहरा और रहस्यमयी कुआं नुमाया हो गया।
बुलडोज़र की कार्रवाई और ज़मीन के सीने से निकला ‘रहस्य’
प्रशासन ने अदालती फ़रमान के तहत भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित विवादित मस्जिद पर पीला पंजा चलाया। इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो चुकी थी, लेकिन अफ़सरों की आंखें तब फटी रह गईं जब गर्द-ओ-गुबार छंटने के बाद वहां क़रीब 20 फीट गहरा एक पुराना कुआं नज़र आया।
ज़मीन की कोख से निकले इस पुराने कुएं ने अब इस पूरे विवाद को एक नया ऐतिहासिक और पुरातात्विक मोड़ दे दिया है। एहतियात के तौर पर कुएं को फौरन ढक दिया गया और मौके पर छावनी जैसी सुरक्षा तैनात कर दी गई। एसडीएम (सदर) सुबोध कुमार के मुताबिक, “अदालत के आदेश पर ढांचे को हटाने के दौरान यह संरचना सामने आई है। अब इसका सच जानने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और भारतीय सर्वेक्षण विभाग की टीमें मौके पर आकर वैज्ञानिक मुआयना करेंगी।”
सपा-कांग्रेस का हल्लाबोल, तो राजभर का नश्तर जैसा वार
कार्रवाई के बाद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी खेमों ने इसे सत्ता का दुरुपयोग बताते हुए आसमान सिर पर उठा लिया। लेकिन विपक्ष के इस एतराज़ पर सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने ऐसा तंज़ कसा कि सपा का सियासी खेमा तिलमिला उठा। अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज़ में राजभर ने सीधे अखिलेश यादव को निशाने पर लेते हुए ऐसा सवाल दागा जो अब चाय की चौपालों से लेकर सोशल मीडिया के हर कोने पर तैर रहा है।
राजभर ने सोशल मीडिया पर तीखा तीर छोड़ते हुए पूछा—
”अखिलेश जी, सहारनपुर जाकर अवैध इमारत के मलबे के सामने फातिहा पढ़ेंगे? मसूद भाई की बातों का समर्थन करेंगे? यूपी पूछ रहा है, बताइए ना?”
राजभर का यह सवाल महज़ एक बयान नहीं, बल्कि सपा के मुस्लिम वोट बैंक और उसकी सियासत की दुखती रग पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। एक तरफ जहां मलबे के नीचे निकले कुएं के तार इतिहास की परतों से जोड़े जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राजभर के इस तीखे सवाल ने सूबे में ध्रुवीकरण की बहस को फिर से गरमा दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ‘मलबे पर फातिहा’ वाले इस सियासी नश्तर का अखिलेश यादव किस अंदाज़ में जवाब देते हैं।
