sahityik karyakram : अर्पित करते हैं उन्हें, हम श्रद्धा के फूल

Bindash Bol
  • जयंती पर याद किए गए फादर कामिल बुल्के

sahityik karyakram : सोमवार को झारखण्ड साहित्य संस्कृति मंच द्वारा हिन्दी साहित्यानुरागी, तुलसी और वाल्मीकि के अनन्य भक्त, पद्मभूषण फादर कामिल बुल्के की जयंती पर ऑनलाइन काव्यार्चन-कार्यक्रम आयोजित किया गया। फादर बुल्के इस मंच के संस्थापकों में से एक और प्रथम संरक्षक रहे हैं। कार्यक्रम का शुभारंभ सुनीता श्रीवास्तव ‘जागृति’ द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। मंच के सचिव बिनोद सिंह गहरवार द्वारा आगत कवि-कवयित्रियों का स्वागत किया गया।

काव्य-पाठ की शुरुआत बिनोद सिंह गहरवार द्वारा हिन्दी की दशा, दिशा और दुर्दशा पर रचित मुक्तकों से हुई। राज रामगढ़ी द्वारा प्रभु श्रीराम की पावन गाथा पर कविता-पाठ किया गया। सुनीता कुमारी ने अपनी कविता में फादर बुल्के को संत एवं साधक बताया। डॉ० सुरिन्दर कौर ‘नीलम’ ने मनहर घनाक्षरी छंद में भाषाविद फादर बुल्के पर अपनी रचना पेश की। सुजाता प्रिय ‘समृद्धि’ की ने कविता में हिन्दी को प्यारी भाषा बताया। सुमिता सिन्हा की कविता मिट्टी की मूर्ति बनाने वाले कलाकार और ईश्वर पर थी। सुनीता श्रीवास्तव ‘जागृति’ ने अपनी कविता ‘खुशनसीब’ में बूढ़े पेड़ के प्रतीक के माध्यम से जीवन का संदेश दिया। अनिता रश्मि ने अपनी कविता में फादर कामिल बुल्के के अपरिमेय व्यक्तित्व का चित्रण किया। हिमकर श्याम द्वारा फादर बुल्के के बहुयामी व्यक्तिव पर सुंदर दोहे ‘अर्पित करते हैं उन्हें, हम श्रद्धा के फूल’ प्रस्तुत किये गए। ममता मनीष सिन्हा द्वारा शिव के नाथ राम पर सुंदर रचना प्रस्तुत की गई। अंत में मंच का सुंदर संचालन कर रही कल्याणी झा ‘कनक’ द्वारा सीता छंद में राम के जन्म और राज्याभिषेक पर कविता प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के उपाध्यक्ष निरंजन प्रसाद श्रीवास्तव ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोद्धन में फादर कामिल बुल्के के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनसे जुड़े कई संस्मरण साझा किया। उन्होंने कहा कि फ्लेमिश भाषा में कामिल का अर्थ ‘वेदी-सेवक’ और ‘फूल’ होता है। फादर बुल्के दोनों अर्थों को चरितार्थ करते थे। मलिक मुहम्मद जायसी की पंक्ति ‘फुल मरै ना बासु’ फादर कामिल बुल्के पर सटीक बैठती है। वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके व्यक्तित्व और कृतित्व की सुरभि बरकरार है। कार्यक्रम का संयोजन ममता मनीष सिन्हा ने और गूगल मीट का आयोजन पूनम वर्मा ने किया। ममता मनीष सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन और श्रीराम वंदना श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन से कार्यक्रम का समापन हुआ।

Share This Article
Leave a Comment