Skyroot Aerospace : भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक और स्वर्णिम अध्याय लिख दिया। हैदराबाद की निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा विकसित भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ शनिवार को श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक लॉन्च हुआ और तय कक्षा (ऑर्बिट) में पहुंचकर इतिहास रच दिया।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ भारत निजी क्षेत्र के दम पर ऑर्बिटल लॉन्च करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया। मिशन की सफलता के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत स्काईरूट की टीम को फोन कर बधाई दी और इसे “मिशन आगमन” बताते हुए कहा, “यह सिर्फ शुरुआत है, अभी और ऊंचाइयां छूनी हैं।”
PM मोदी बोले— युवाओं ने कर दिखाया कमाल
प्रधानमंत्री ने लॉन्च का पूरा कार्यक्रम लाइव देखा। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों की तारीफ करते हुए कहा कि टीम के 20-30 वर्ष के इंजीनियरों ने साबित कर दिया कि भारत के युवाओं पर भरोसा करना सही फैसला था।
उन्होंने कहा, “जब हमने स्पेस सेक्टर को निजी क्षेत्र के लिए खोला था, तब कई लोगों ने सवाल उठाए थे। आज आपकी सफलता ने उस फैसले को सही साबित कर दिया।”
450 KM की ऊंचाई पर पहुंचा विक्रम-1
तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज, एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल और 3D-प्रिंटेड इंजन से लैस विक्रम-1 ने अपने सभी चरण सफलतापूर्वक पूरे किए और लगभग 450 किलोमीटर ऊंची लो अर्थ ऑर्बिट में कई पेलोड स्थापित किए।
क्या-क्या लेकर गया अंतरिक्ष?
इस मिशन में कई महत्वपूर्ण पेलोड भेजे गए, जिनमें स्काईरूट का SCOPE सैटेलाइट, डीक्यूब्ड का टेक्नोलॉजी डेमो पेलोड, ग्रह स्पेस का Solars S3, कॉस्मोसर्व का ‘Embrace’ रोबोटिक आर्म, “कॉस्मिक ब्लूम” नाम की कलाकृति और वैज्ञानिक सी.वी. रमन, विक्रम साराभाई व डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की सूक्ष्म प्रतिमाओं वाला 18 कैरेट सोने का माइक्रो-रॉकेट भी शामिल रहा।
‘वंदे मातरम्’ भी पहुंचा अंतरिक्ष
स्काईरूट के सह-संस्थापक नागा भरत डाका ने पीएम मोदी को बताया कि उनका भेजा ‘वंदे मातरम्’ संदेश भी सफलतापूर्वक ऑर्बिट में पहुंच गया है।
इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि “‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। आज यह अंतरिक्ष में पहुंचकर नई पीढ़ी को आत्मनिर्भर भारत और तकनीकी उत्कृष्टता की प्रेरणा दे रहा है।”
भारत के स्पेस सेक्टर की नई उड़ान
विक्रम-1 की सफलता केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि भारत के निजी अंतरिक्ष उद्योग, आत्मनिर्भरता और युवा नवाचार की नई उड़ान है। यह मिशन आने वाले वर्षों में भारत को वैश्विक स्पेस इकोनॉमी में और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।