Student Protest  : रांची की सड़कों पर छात्रों का हुंकार: “बंद कमरे में सौदेबाज़ी नहीं, कैमरे के सामने होगी सीधी बात!”

Bindash Bol

* रांची में छात्रों का प्रदर्शन जारी, सरकार के साथ बातचीत के लिए 5 लोगों को डेलिगेशन तय, दोपहर में हो सकती है मीटिंग

Student Protest  :झारखंड की राजधानी रांची में प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई भारी धांधली के खिलाफ छात्रों का गुस्सा अब उबल चुका है। हज़ारों नौजवानों के भविष्य से खिलवाड़ के विरोध में उतरा छात्रों का यह आंदोलन अब आर-पार के मूड में है। सरकार के झुकने के संकेतों के बीच छात्रों ने वार्ता के लिए 5 सदस्यीय डेलिगेशन तो तय कर लिया है, लेकिन साफ चेतावनी दी है—बातचीत बंद दरवाजों के पीछे छिपे किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि मीडिया के कैमरों और पूरे झारखंड की जनता की आंखों के सामने होगी।

“फाइलें दबाने का खेल बंद करो, सीधे मैदान में आओ!”

​छात्रों ने सरकार की मंशा पर करारा हमला बोलते हुए साफ कर दिया है कि वे इस बार किसी गोलमोल आश्वासन या धोखे के जाल में नहीं फंसने वाले। आंदोलनकारियों का सीधा कहना है…

​”26 सालों से छात्रों की आवाज को बंद कमरों में दबाया गया और फाइलों को हमेशा के लिए दफन कर दिया गया। पिछले प्रदर्शन में भी हमारे प्रतिनिधियों को बंद कमरे में ले जाकर आंदोलन की हवा निकालने की साजिश रची गई थी। इस बार यह छलावा नहीं चलेगा! मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन खुद आएं, लाइव मीडिया के सामने हमारी मांगें सुनें और जो वादा करना है, पूरी दुनिया के सामने करें।”

छात्रों ने ठोकीं दो दोटूक शर्तें…

* ​सीधा संवाद सिर्फ CM से: किसी बिचौलिए या टालमटोल करने वाले प्रतिनिधि से बात नहीं होगी। वार्ता में मुख्यमंत्री की सीधी मौजूदगी अनिवार्य है।

* ​कैमरे के सामने होगी बात: वार्ता कक्ष में कम से कम दो मीडिया प्रतिनिधियों का होना तय किया जाए ताकि पल-पल की सच्चाई बाहर आ सके।

भ्रम में सरकार, मंत्रियों के बयानों में अंतर्विरोध

​एक तरफ छात्र अपने तेवरों के साथ मोर्चे पर डटे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार की घेराबंदी में उसकी घबराहट साफ दिख रही है।

* ​परीक्षा धांधली मामले में अब तक 19 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जो यह साबित करने के लिए काफी है कि परीक्षा में किस कदर सड़ांध फैली थी।

* ​एक तरफ मंत्री इरफान अंसारी वार्ता का ढोल पीट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का बयान आता है कि बातचीत के लिए कोई औपचारिक कमेटी बनी ही नहीं है—सुदिव्य कुमार सोनू, दीपिका पांडेय सिंह, संजय प्रसाद यादव और चमरा लिंडा जैसे मंत्रियों का समूह सिर्फ “नजर रखने” के लिए है!

सरकार का यह ढुलमुल रवैया और अंतर्विरोध यह बताने के लिए काफी है कि वह छात्रों के इस आक्रोश से बैकफुट पर है।

फैसला अब सरकार के पाले में

​स्टूडेंट लीडर रवींद्र पासवान ने साफ किया है कि लोकतंत्र में संवाद जरूरी है, इसलिए छात्र बातचीत से पीछे नहीं हट रहे हैं। लेकिन गेंद अब हेमंत सरकार के पाले में है। अगर सरकार में नीयत की साफ-गोई है, तो उसे छात्रों की पारदर्शी और लाइव बातचीत की शर्त स्वीकार करनी होगी।
​रांची की सड़कों पर डटे युवाओं का संदेश अब बिल्कुल स्पष्ट और आक्रामक है: “अब आश्वासन नहीं, सीधे एक्शन चाहिए—और बात होगी तो पूरे झारखंड के सामने होगी!”

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