Suvendu Adhikari : बंगाल में ‘अधिकारी’ राज: सुवेंदु के हाथ सत्ता की कमान!जानें बंगाल के नए ‘अधिकारी’ का राजनीतिक इतिहास

Bindash Bol

* कांग्रेस से शुरू किया राजनीतिक सफर, ढहाया ‘दीदी’ का किला, जानें बंगाल के नए ‘अधिकारी’ का राजनीतिक इतिहास

* शाह ने किया ऐलान, कल 11 बजे शपथ ग्रहण

मानव बोस

Suvendu Adhikari :पश्चिम बंगाल की सत्ता का जिम्मा अब ‘अधिकारी’ संभालेंगे. कोलकाता में BJP विधायक दल की बैठक में सुवेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. जिसके बाद बंगाल में नए मुख्यमंत्री के तौर पर सुवेंदु अधिकारी का नाम फाइनल हो गया है.
बताया जा रहा है विधायक दल की बैठक में बंगाल BJP अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने सुवेंदु के नाम का प्रस्ताव रखा. पश्चिम बंगाल में अमित शाह BJP के पर्यवेक्षक बने हैं, जबकि सह पर्यवेक्षक के तौर पर ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन माझी को जिम्मा मिला है.

अमित शाह की अध्यक्षता में कोलकाता में BJP विधायक दल की बैठक हुई. इससे पहले अमित शाह ने कोलकाता में दक्षिणेश्वर काली मंदिर में दर्शन पूजन किया. पार्टी ने 9 मई की तारीख शपथ के लिए तय की है. इसी दिन रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती भी है. कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में कल 10 बजे मुख्यमंत्री शपथ लेंगे. शपथ ग्रहण समारोह में PM मोदी, शाह समेत NDA के कई बड़े नेता शामिल होंगे. बंगाल BJP के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य सुवेंदु के नाम का प्रस्ताव रखेंगे.

बंगाल में BJP को कितनी सीटें मिली?

पश्चिम बंगाल में TMC को हराकर BJP ने 207 सीटें हासिल की है. वहीं, सुवेंदु अधिकारी इस जीत में पार्टी के पोस्टर ब्वॉय रहे. उन्होंने ममता बनर्जी को नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों से हराया.

बंगाल के नए ‘अधिकारी’ का राजनीतिक इतिहास

बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है. राज्य में संगठन को मजबूत करने और नेतृत्व को स्पष्ट दिशा देने की कोशिशों के बीच अब सबसे बड़ा नाम सुवेंदु अधिकारी का सामने आया है. कोलकाता में हुई बीजेपी विधायक दल की बैठक में उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया. इसके बाद अमित शाह ने बंगाल के नए मुख्यमंत्री के तौर पर उनके नाम का औपचारिक ऐलान किया. यह फैसला पार्टी के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है.

विधायक दल का नेता चुने जाने का फैसला

इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे. उनके सामने लिए गए इस निर्णय को पार्टी की बंगाल रणनीति का बड़ा संकेत माना जा रहा है. सुवेंदु अधिकारी को अब न केवल पश्चिम बंगाल बल्कि पूरे पूर्वोत्तर में बीजेपी के मजबूत चेहरों में गिना जा रहा है.

कौन हैं सुवेंदु अधिकारी

सुवेंदु अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर के कांथी में एक समृद्ध राजनीतिक परिवार में हुआ था. उनके पिता शिशिर अधिकारी लंबे समय तक सक्रिय सांसद रहे हैं और तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए. परिवार में राजनीति का माहौल होने के कारण सुवेंदु को शुरुआत से ही नेतृत्व और जनसंपर्क की समझ मिली. उनकी मां गायत्री अधिकारी भी परिवार के सामाजिक जीवन में अहम भूमिका निभाती रही हैं.

कब की राजनीतिक शुरुआत

सुवेंदु ने 1989 में कांग्रेस छात्र परिषद से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. उस समय पश्चिम बंगाल में वामपंथी छात्र संगठनों का दबदबा था, लेकिन उन्होंने विपक्ष में रहते हुए अपनी पहचान बनाई. वर्ष 1995 में कांथी नगर पालिका से पार्षद बनकर उन्होंने चुनावी राजनीति में औपचारिक कदम रखा. इसके बाद उन्होंने धीरे धीरे राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की. उनके निजी जीवन की बात करें तो सुवेंदु अधिकारीने शादी नहीं की है. उनके भाई सुवेंदु अधिकारी भी राजनीति में सक्रिय हैं जबकि एक अन्य भाई दिब्येंदु अधिकारी पहले तृणमूल कांग्रेस से सांसद रह चुके हैं. राजनीतिक परिवार होने के बावजूदउनके भीतर आपसी मतभेद भी समय समय पर चर्चा में रहे हैं. हाल ही में उनके पीए की घटना के बाद परिवार एक बार फिर सुर्खियों में आया.

कितनी है संपत्ति?

चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास करीब 85.87 लाख रुपये की घोषित संपत्ति है. उनके पास नगद राशि मात्र 12 हजार रुपये है और उनके नाम पर कोई कार दर्ज नहीं है. उन पर किसी तरह का कर्ज भी नहीं है जो उन्हें वित्तीय रूप से मजबूत स्थिति में बताता है. राजनीति के जानकारों का मानना है कि सुवेंदु अधिकारी का यह उभार बंगाल की राजनीति में आने वाले समय में बड़े बदलाव का संकेत है. बीजेपी उन्हें एक मजबूत क्षेत्रीय नेता के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. आने वाले समय में उनकी भूमिका और भी अहम हो सकती है.

बताते चलें कि स्थानीय राजनीतिक जानकारों का यह भी कहना है कि सुवेंदु अधिकारी की राजनीतिक शैली जमीनी स्तर से जुड़ी हुई है, जिससे उन्हें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समर्थन मिल सकता है. संगठनात्मक मजबूती और लगातार जनसंपर्क उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है. आने वाले विधानसभा चुनावों में उनकी रणनीति और नेतृत्व क्षमता बीजेपी के लिए निर्णायक साबित हो सकती है.

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