India Iran Talks : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत की चिंता साफ दिखाई दे रही है। इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन से फोन पर अहम बातचीत की। इस बातचीत में भारत ने साफ कहा कि इस समय उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता दो चीजें हैं-विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और तेल-गैस सहित जरूरी सामान की सप्लाई बिना रुकावट जारी रहना।
क्या मिडिल ईस्ट का बढ़ता संघर्ष भारत के लिए नया संकट बन सकता है?
प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति के बीच यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है। कई जगह हमले हो रहे हैं, आम लोगों की जान जा रही है और बड़े-बड़े तेल और ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री ने इस पूरे हालात पर गहरी चिंता जताई और कहा कि हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए शांति, बातचीत और कूटनीति ही सबसे सही रास्ता है। भारत ने हमेशा से क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थन किया है और इस बार भी वही रुख दोहराया गया।
क्यों इतना अहम है Strait of Hormuz?
मौजूदा संकट का सबसे बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर पैदा हुआ तनाव है। यह दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। इसी रास्ते से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई गुजरती है। हाल ही में ईरान द्वारा इस रास्ते को अवरुद्ध करने की खबरों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है तो वैश्विक तेल संकट और ज्यादा गहरा सकता है। इससे भारत जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।
क्या भारतीय तेल टैंकरों को मिल गया सुरक्षित रास्ता?
इस संकट के बीच भारत ने कूटनीतिक स्तर पर तेजी से कदम उठाए हैं। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अपने ईरानी समकक्ष से बातचीत की। सूत्रों के मुताबिक ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए सुरक्षित मार्ग देने का भरोसा दिया है। बताया जा रहा है कि भारत और ईरान के बीच बातचीत जारी है ताकि कम से कम 20 भारतीय तेल और गैस टैंकर सुरक्षित तरीके से इस रास्ते से गुजर सकें।
क्या युद्ध का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है?
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर भारतीयों पर भी पड़ा है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पुष्टि की है कि इस क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में दो भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है, जबकि एक अन्य भारतीय अभी भी लापता बताया जा रहा है। ये भारतीय उन जहाजों पर काम कर रहे थे जिन्हें इस संघर्ष के दौरान निशाना बनाया गया। इस घटना ने भारत की चिंता और बढ़ा दी है।
क्या कूटनीति ही बनेगी इस संकट से निकलने का रास्ता?
भारत इस पूरे संकट को बहुत गंभीरता से देख रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी बातचीत में साफ कहा कि भारतीयों की सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने एक बार फिर जोर देकर कहा कि इस बढ़ते संघर्ष का समाधान बातचीत, कूटनीति और शांति से ही संभव है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट का यह संकट किस दिशा में जाता है और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था व ऊर्जा बाजार पर कितना असर पड़ता है।
