* मौत से भी बड़ी ममता: बरगी डैम में बेटे को सीने से लगाकर डूब गई मां
* लहरें जीत गईं, लेकिन ममता नहीं हारी — आखिरी सांस तक बेटे की ढाल बनी मां
BargiDamTragedy : यह तस्वीर केवल एक दुर्घटना का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि ममता की उस पराकाष्ठा की गवाही है जिसे शब्दों में पिरोना लगभग असंभव है। जब मौत की लहरें जीवन को निगलने के लिए आतुर थीं, तब एक मां की आखिरी कोशिश अपने बेटे को बचाने की थी।
हादसे में मरीना मैसी और उनके चार साल के बेटे त्रिशान की भी मौत हो गई। बचाव दल को आज सुबह दोनों के शव मिले। मां ने अपनी ही लाइफ जैकेट के भीतर अपने कलेजे के टुकड़े को समेट लिया था। उसने बच्चे को अपने सीने से इतनी मजबूती से चिपकाया था कि काल का क्रूर झोंका भी उन्हें अलग नहीं कर सका।
जबलपुर की शांत दिखने वाली बरगी डैम आज अपनी ही गोद में एक ऐसी त्रासदी समेटे हुए थी, जिसने ममता के पर्याय को फिर से परिभाषित कर दिया। क्रूज हादसे की उस भयावह दोपहर में, जब पानी का शोर चीखों से बड़ा हो गया था, तब एक मां ने अपनी जिंदगी के लिए नहीं, बल्कि अपनी कोख के उस अंश के लिए मौत से मोर्चा लिया था।
उखड़ती सांसें और फौलादी पकड़
तस्वीर को देखिए—यह उस पल की है जब सांसें साथ छोड़ चुकी थीं, लेकिन मां की भुजाओं ने अपने बेटे को अब भी वैसे ही जकड़ा हुआ था जैसे उसने उसे पहली बार अपनी गोद में लिया होगा। वह लाल लाइफ जैकेट शायद पानी की गहराई से तो नहीं लड़ पाई, लेकिन उस मां के संकल्प के सामने वो भी एक ढाल बन गई थी। मरते दम तक उसने अपने मासूम को अपने सीने से अलग नहीं होने दिया। वह चाहती थी कि अगर काल उसे ले जाए, तो उसका बेटा उसकी धड़कनों की आखिरी गूंज सुनते हुए विदा हो।
व्यवस्था का मौन और जनता का दर्द
लोग कहेंगे कि कुदरत का कहर था, लेकिन क्या प्रशासन की लापरवाही इस गुनाह में बराबर की शरीक नहीं? बरगी डैम की धारा तो मूक है, वह अपनी निंदा सह लेगी, लेकिन सफेदपोशों और लापरवाह तंत्र के पास इस मां के सवालों का कोई जवाब नहीं है। वे बचाव कार्य की ढुलमुल गति के पीछे छिप जाएंगे, आंकड़ों के खेल में उलझा देंगे, पर उस मां की आंखों में ठहरे हुए उस आखिरी डर और हिम्मत का हिसाब कौन देगा?
”गलती उन मां-बेटों की नहीं थी जो समय रहते बचावकर्मियों को नहीं मिले, गलती उस व्यवस्था की थी जिसने सुरक्षा के वादों को कागज की नाव बना दिया था।”
यह तस्वीर हमें चीख-चीख कर बता रही है कि इस दुनिया में अगर खुदा का कोई वजूद है, तो वह उस मां की बाहों में था, जो खुद डूब गई पर अपने बच्चे को अंत तक नहीं छोड़ा। आज बरगी डैम का जल भले ही शांत हो, लेकिन हर संवेदनशील इंसान के दिल में एक गहरा सुराग छोड़ गया है।