* हजारीबाग ‘निर्भया’ कांड: तांत्रिक अनुष्ठान में बच्ची की हत्या! महिला आयोग को नहीं मिले दस्तावेज, जांच पर उठे गंभीर सवाल
Jharkhand : झारखंड के हजारीबाग जिले में 12 वर्षीय बच्ची की कथित नरबलि से जुड़े सनसनीखेज मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। मामले की जांच के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की तीन सदस्यीय टीम शुक्रवार को घटनास्थल पहुंची और पूरे घटनाक्रम की गहन पड़ताल की।
घटनास्थल पहुंची आयोग की टीम
आयोग की सदस्य ममता कुमारी, मनमोहन वर्मा और कंचन की टीम ने पीड़ित परिवार, स्थानीय ग्रामीणों और पड़ोसियों से बातचीत कर घटनाओं की कड़ी जोड़ने की कोशिश की। टीम ने आरोपी तांत्रिक के रिश्तेदारों से भी पूछताछ की ताकि पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि समझी जा सके।
हालांकि जांच के दौरान सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब आयोग ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने अब तक मामले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए।
पुलिस पर सहयोग न करने का आरोप
आयोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन ने जांच अधिकारी, थाना प्रभारी या न्यायिक हिरासत में बंद आरोपियों से मिलने की अनुमति भी नहीं दी। इससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं।
इसके बाद समिति ने हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक और उपायुक्त से मुलाकात कर सभी जरूरी दस्तावेज तुरंत सौंपने का निर्देश दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के अनुसार कुसुंभा गांव में रहने वाली रेशमी देवी अपने बीमार बेटे के इलाज के लिए एक तांत्रिक के संपर्क में थी। तांत्रिक ने कथित तौर पर दावा किया कि बच्चे को ठीक करने के लिए ‘कुंवारी लड़की की बलि’ देनी होगी।
24 मार्च को राम नवमी के मंगला जुलूस के दौरान, जब पूरा गांव उत्सव में व्यस्त था, तब बच्ची को कथित रूप से घर के अंदर ले जाकर उसका गला घोंट दिया गया। पुलिस ने बच्ची की मां समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
सियासी मोर्चे पर भी गरमाया मामला
कांग्रेस की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि “चंदा मामा जैसी कहानियों पर कोई विश्वास नहीं करेगा।” उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की।
सवाल जो अब भी बाकी हैं
* पुलिस ने दस्तावेज क्यों नहीं दिए?
* क्या जांच में कुछ छिपाया जा रहा है?
* अंधविश्वास के नाम पर हत्या या कहानी कुछ और?
हजारीबाग ‘निर्भया’ कांड अब सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, अंधविश्वास और जांच प्रणाली की विश्वसनीयता की बड़ी परीक्षा बन चुका है।
