* राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका! राहुल गांधी की करीबी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, सियासत में मचा तूफान
Meenakshi Natarajan : मध्य प्रदेश की राजनीति में उस वक्त जबरदस्त भूचाल आ गया, जब राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की उम्मीदवार और राहुल गांधी की करीबी सहयोगी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया। इस फैसले ने न सिर्फ कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है, बल्कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी जंग को भी नई धार दे दी है।
नामांकन रद्द होने के पीछे क्या है पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट की आपत्ति से हुई। बीजेपी की ओर से दावा किया गया कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना से जुड़े एक लंबित मामले की जानकारी छिपाई है। बीजेपी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक उम्मीदवारों को सभी लंबित मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है। इसी आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया।
कांग्रेस का पलटवार- यह कानून नहीं, राजनीति है
कांग्रेस ने इस फैसले को पूरी तरह राजनीतिक करार दिया है। पार्टी का कहना है कि जिस मामले का हवाला देकर नामांकन रद्द किया गया, वह कोई आपराधिक मामला नहीं बल्कि एक साधारण “शो-कॉज़ नोटिस” था, जिसका उल्लेख हलफनामे में करना जरूरी नहीं था।
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि बीजेपी राज्यसभा की एक सीट हासिल करने के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर रही है। पार्टी ने इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बताया है।
दिल्ली से भोपाल तक कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
फैसले के बाद कांग्रेस नेतृत्व तुरंत सक्रिय हो गया। सचिन पायलट, भूपेश बघेल, जयराम रमेश और केसी वेणुगोपाल सहित कई वरिष्ठ नेता चुनाव आयोग पहुंचे और फैसले के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने और विपक्ष को चुनावी मुकाबले से बाहर करने की सुनियोजित कोशिश है।
कौन हैं मीनाक्षी नटराजन?
24 मई 1973 को जन्मीं मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की सबसे प्रभावशाली महिला नेताओं में गिनी जाती हैं। छात्र राजनीति से अपना सफर शुरू करने वाली नटराजन 1999 से 2002 तक NSUI की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं।
राहुल गांधी के नेतृत्व में उन्हें कांग्रेस संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं और 2009 में उन्होंने मंदसौर लोकसभा सीट जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। फरवरी 2025 में उन्हें कांग्रेस का तेलंगाना प्रभारी नियुक्त किया गया था।
अब आगे क्या?
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना कांग्रेस के लिए राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह इस फैसले को अदालत में चुनौती देगी।
अब सबकी निगाहें न्यायालय और चुनाव आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यही है कि क्या कांग्रेस कानूनी लड़ाई में राहत हासिल कर पाएगी या फिर राज्यसभा की यह सीट बिना मुकाबले बीजेपी के खाते में चली जाएगी? फिलहाल मध्य प्रदेश की राजनीति में सस्पेंस और टकराव दोनों चरम पर हैं।