Jharkhand Politics : झारखंड की राजनीति में सरयू राय का सियासी विस्फोटकांग्रेस-भाजपा से अलग सरकार चलाने का दिया नया फार्मूला

Sushmita Mukherjee

झारखंड में सियासी भूचाल: सरयू राय का ‘नया फॉर्मूला’, बोले– ‘कांग्रेस की बैसाखी’ छोड़ें हेमंत सोरेन

Jharkhand Politics : झारखंड की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कद्दावर विधायक और ‘सियासी चाणक्य’ माने जाने वाले सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक ऐसा फॉर्मूला दिया, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। जेएमएम और कांग्रेस के बीच बढ़ती तल्खी के बीच, राय ने दावा किया है कि हेमंत सोरेन बिना कांग्रेस और भाजपा के सहयोग के भी शान से सरकार चला सकते हैं

धनबाद में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने साफ कहा कि अगर राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई जाए तो झारखंड मुक्ति मोर्चा अपने दम पर वैकल्पिक सत्ता समीकरण तैयार कर सकती है।

बिना शर्त समर्थन’ का बड़ा दांव

​धनबाद पहुंचे सरयू राय ने साफ तौर पर कहा कि यदि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हिम्मत दिखाते हैं, तो वे उन्हें बाहर से बिना किसी शर्त के समर्थन देने को तैयार हैं। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जेएमएम को अब इस “बैसाखी” की जरूरत नहीं है।

बहुमत का गणित भी बताया

सरयू राय ने विधानसभा की मौजूदा संख्या का हवाला देते हुए सरकार गठन का पूरा गणित सामने रखा। उनके मुताबिक बहुमत के लिए 41 विधायकों का आंकड़ा जरूरी है और यह संख्या बिना कांग्रेस या भाजपा के भी जुटाई जा सकती है।
उनका दावा है कि —
जेएमएम के 34 विधायक
राष्ट्रीय जनता दल के 4 विधायक
वाम दलों के 2 विधायक
और जयराम महतो (JLKM) का 1 समर्थन
मिलाकर सरकार स्थिर बहुमत हासिल कर सकती है।

राय ने यह भी ऐलान किया कि यदि ऐसी पहल होती है तो वे खुद बिना किसी शर्त के बाहर से समर्थन देने को तैयार हैं।

​कांग्रेस पर तीखा हमला: “रिश्तों में सिर्फ इस्तेमाल”
​राय ने कांग्रेस और जेएमएम के बीच की कड़वाहट को उजागर करते हुए कहा कि कांग्रेस केवल अपनी सुविधा के लिए गठबंधन करती है।

​बिहार का हवाला: बिहार चुनाव में कांग्रेस ने जेएमएम को तवज्जो नहीं दी।

​असम का विवाद: असम चुनाव को लेकर भी दोनों दलों में खींचतान जारी है।

​साख पर सवाल: उन्होंने कहा कि चुनाव में एक-दूसरे को कोसना और फिर सत्ता के लिए साथ आ जाना गठबंधन की विश्वसनीयता को खत्म करता है।

​अफसरशाही और माफिया: सोरेन को नसीहत

​सरयू राय यहीं नहीं रुके; उन्होंने झारखंड के अफसरों को ‘माफिया’ कहे जाने वाले बयानों पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर हमला करार दिया। राय ने सलाह दी कि यदि हेमंत सोरेन अपना राजनीतिक कद बचाना चाहते हैं, तो उन्हें इन विवादों से निकलकर नई राह पकड़नी होगी।

​असम चुनाव के बाद ‘महा-फेरबदल’ के संकेत

​सरयू राय ने भविष्यवाणी की है कि असम चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति एक नया मोड़ लेगी। उनके इस प्रस्ताव ने झारखंड की सियासत में नई अटकलों को जन्म दे दिया है—क्या हेमंत सोरेन कांग्रेस का साथ छोड़कर सरयू राय के इस ‘लोकल फॉर्मूले’ पर भरोसा करेंगे?

कुल मिलाकर, झारखंड की राजनीति में अब सवाल यह है…

क्या हेमंत सोरेन कांग्रेस से दूरी बनाकर नई राह चुनेंगे, या महागठबंधन की गाड़ी पहले की तरह चलती रहेगी?
झारखंड की सियासत में आने वाले दिन बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।

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