* एटीएस, आईबी ने डॉ. आरिफ अंसारी परिवार से नौ घंटे पूछताछ की।
* बेटे अबु बकर पर कश्मीरी हैंडलर, पाकिस्तानी संदिग्धों से संपर्क का आरोप।
* इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जब्त, टेरर फंडिंग की भी अटकलें।
Varanasi : वाराणसी, जिसे हम धर्म और आध्यात्म की नगरी कहते हैं, वहां से एक ऐसी खबर आई है जिसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। एक तरफ मरीजों की जान बचाने का संकल्प लेने वाला डॉक्टर, और दूसरी तरफ उसी के घर में बुना जा रहा दहशतगर्दी का ताना-बाना। पेश है इस पूरे मामले पर एक विस्तृत रिपोर्ट…
1. ऑपरेशन ‘क्लीन स्वीप’: तीन राज्यों की घेराबंदी
मंगलवार को वाराणसी के आदमपुर थाना क्षेत्र (पठानी टोला) में जब सुबह की चहल-पहल शुरू हुई थी, तभी मुंबई ATS, यूपी ATS और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) की संयुक्त टीम ने डॉ. आरिफ अंसारी के घर पर धावा बोल दिया। यह कोई साधारण तलाशी नहीं थी, बल्कि एक पुख्ता इनपुट के आधार पर किया गया ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसा एक्शन था।
2. ‘पीडियाट्रिक’ क्लीनिक और पाकिस्तान कनेक्शन
डॉ. आरिफ अंसारी इलाके में एक बाल रोग विशेषज्ञ (पीडियाट्रिशियन) के रूप में जाने जाते थे। बाहर से देखने पर एक प्रतिष्ठित परिवार, लेकिन जांच एजेंसियों को शक है कि इस सफेद कोट की आड़ में टेरर फंडिंग और स्लीपर सेल को खाद-पानी दिया जा रहा था।
* बड़ा खुलासा: छापेमारी के दौरान डॉक्टर के लैपटॉप और मोबाइल से कई संदिग्ध डेटा मिले हैं।
* ISI और JeM का साया: शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क सीमा पार बैठे आकाओं (ISI और जैश-ए-मोहम्मद) के संपर्क में हो सकता है।
3. ‘अबू बकर’ और कश्मीरी हैंडलर का चैट कोड
इस पूरी घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू डॉक्टर का 20 वर्षीय बेटा अबू बकर है। वह वाराणसी में रहकर NEET (मेडिकल प्रवेश परीक्षा) की तैयारी कर रहा था। लेकिन किताबों के पीछे वह कुछ और ही ‘समीकरण’ हल कर रहा था:
* 7 से 9 घंटे की पूछताछ: सुरक्षा एजेंसियों ने अबू बकर से मैराथन पूछताछ की।
* हैंडलर से चैटिंग: जांच में सामने आया कि अबू बकर एक कश्मीरी हैंडलर के जरिए पाकिस्तान में बैठे लोगों से चैटिंग कर रहा था।
* भटकाव या साजिश? एक युवा जो डॉक्टर बनने की राह पर था, वह कैसे और क्यों आतंकियों के संपर्क में आया, यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।
प्रमुख बिंदु: जांच के घेरे में क्या-क्या है?

गंभीर चेतावनी: जब रक्षक ही भक्षक की राह पर हों
यह घटना सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि एक वेक-अप कॉल है।
* युवाओं का ब्रेनवॉश: यह दर्शाता है कि कैसे आतंकी संगठन अब पढ़े-लिखे परिवारों और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को निशाना बना रहे हैं।
* पड़ोस पर नजर: काशी की तंग गलियों से लेकर बड़े अस्पतालों तक, दुश्मन ने पैठ बनाने की कोशिश की है।
“डॉक्टर का पेशा भगवान का रूप माना जाता है, लेकिन अगर उसी घर से देश के खिलाफ साजिश रची जाए, तो यह सबसे बड़ा विश्वासघात है। ATS और IB की मुस्तैदी ने एक बड़ी घटना को टाल दिया है, लेकिन ‘पठानी टोला’ की इस घटना ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं।”