* जगन्नाथपुर मंदिर के हत्यारों को पुलिस ने पहनाई ‘भगवान की चुनरी’, उठ रहे हैं गंभीर सवाल
* भक्ति की आड़ में ‘दागी’ चेहरे: रांची पुलिस का ये कैसा न्याय?
Ranchi Police : रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में गार्ड बिरसा मुंडा की निर्मम हत्या ने राजधानी को दहला दिया था। लेकिन पुलिस ने जब आरोपियों—देव कुमार, आयुष और विकास—को मीडिया के सामने पेश किया, तो इंसाफ से ज्यादा ‘चुनरी’ चर्चा में आ गई।
बड़ा सवाल: क्या मंदिर की पवित्र चुनरी अब हत्यारों का नकाब बनेगी?
जिस चुनरी को भक्त माथे से लगाते हैं, पुलिस ने उसी से कातिलों का मुंह ढककर आखिर क्या संदेश दिया है?
यह न केवल धार्मिक आस्था का अपमान है, बल्कि पुलिसिया कार्यप्रणाली पर भी एक तीखा व्यंग्य है। क्या कानून के पास अपराधियों को ढंकने के लिए नकाब कम पड़ गए थे, जो आस्था के प्रतीक को ही ढाल बना दिया गया? वर्दी के इस ‘कारनामे’ ने अब एक नई बहस छेड़ दी है।
गौरतलब है कि रांची के जगन्नाथपुर मंदिर में तैनात सुरक्षा गार्ड बिरसा मुंडा की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित एसआईटी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस सनसनीखेज कांड में शामिल तीन अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है।
यह घटना 24 अप्रैल 2026 की है, जब अज्ञात अपराधियों ने मंदिर में घुसकर न केवल दान पेटी से नकदी चोरी की, बल्कि पहचान उजागर होने के डर से सुरक्षा गार्ड की हत्या भी कर दी। इस मामले में धुर्वा थाना में कांड संख्या 88/26 दर्ज किया गया था। जांच के दौरान घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को धर दबोचा। पूछताछ में सभी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
पुलिस इसके लिए धन्यवाद की पात्र हो सकती है मगर जो बड़ी बात है यह है कि क्या आस्था का प्रतीक अब अपराधियों को ढकने का माध्यम बनेगा?
यह मामला सिर्फ एक हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है। अब सवाल पुलिस की पेशेवर मर्यादा, धार्मिक प्रतीकों के सम्मान और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर खड़े हो रहे हैं।