* क्या भवानीपुर में सचमुच हार रही हैं ममता? लक्षण सही नहीं लग रहे
Bhowanipore War : पश्चिम बंगाल की सियासत इस वक्त उस ज्वालामुखी की तरह दहक रही है, जो किसी भी वक्त फट सकता है। लेकिन भवानीपुर के रणक्षेत्र में जो हुआ, उसने पूरी राजनीतिक बिसात को हिलाकर रख दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जिन्हें उनके समर्थक ‘अजेय’ मानते थे, अपनी ही जमीन पर असहज और बेबस नजर आईं। आलम यह था कि महज 100 मीटर की दूरी पर जब शुभेंदु अधिकारी की सभा का शोर गूंजा, तो ममता बनर्जी अपना संतुलन खो बैठीं और भाषण बीच में ही छोड़कर रणभूमि से ‘विदाई’ ले ली।
दहशत में टीएमसी? दीदी के गढ़ में शुभेंदु का ‘विस्फोट’
भवानीपुर को टीएमसी का अभेद्य किला कहा जाता है, लेकिन शनिवार को इस किले की दीवारें दरकती नजर आईं। ममता बनर्जी जब अपनी रैली को संबोधित कर रही थीं, तभी कुछ ही फासले पर बीजेपी के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी की जनसभा शुरू होने वाली थी। बीजेपी समर्थकों का हुजूम और उनके लाउडस्पीकर्स से निकलती ‘जय श्री राम’ की गूंज ने ममता बनर्जी को इस कदर विचलित कर दिया कि उन्होंने इसे अपनी रैली को प्रभावित करने की साजिश करार दे दिया।
“बीजेपी ने जानबूझकर लाउडस्पीकर मेरी ओर किए हैं ताकि मैं अपनी बात न रख सकूं।” — ममता बनर्जी
(नाराजगी में भाषण छोड़ते हुए)
अमित मालवीय का तीखा हमला: “हार के डर से खोया संतुलन”
बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने घटना का वीडियो साझा करते हुए सीधे तौर पर ममता बनर्जी की मानसिक स्थिति और हार के डर पर सवाल उठाए। मालवीय का दावा है कि ममता बनर्जी को अब अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है, और यही घबराहट उन्हें मंच छोड़ने पर मजबूर कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि ममता का यह व्यवहार एक ‘लीडर’ के आत्मविश्वास की कमी को दर्शाता है।
सड़कों पर संग्राम: टीएमसी और बीजेपी में खूनी भिड़ंत की नौबत
ममता बनर्जी के मैदान छोड़ते ही उनके समर्थकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। टीएमसी कार्यकर्ताओं ने शुभेंदु अधिकारी की सभा की ओर कूच किया, जिसके बाद दोनों गुटों में जमकर पत्थरबाजी और नारेबाजी हुई। पुलिस ने आनन-फानन में मोर्चा संभाला, वरना भवानीपुर की गलियां खून से लाल हो सकती थीं। शुभेंदु अधिकारी ने पलटवार करते हुए कहा कि “बंगाल में गुंडाराज का अंत करीब है और जनता इसका करारा जवाब देगी।”
चुनाव आयोग का ‘एक्शन’: रातों-रात बदले गए थानों के इंचार्ज
भवानीपुर में बढ़ते तनाव को देखते हुए चुनाव आयोग ने चाबुक चलाया है। ममता बनर्जी के आवास के पास वाले कालीघाट और अलीपुर थानों के प्रभारियों को तुरंत हटाकर नए चेहरों की तैनाती कर दी गई है। यह फेरबदल साफ संकेत दे रहा है कि सुरक्षा एजेंसियां अब किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं हैं।
बड़ा सवाल: क्या 29 अप्रैल को होने वाला मतदान ममता बनर्जी के 10 साल के साम्राज्य का अंत कर देगा? क्या भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी ने ममता के ‘विजय रथ’ को रोक दिया है? 4 मई को आने वाले नतीजे बताएंगे कि बंगाल में ‘दीदी’ का जादू बचा है या ‘कमल’ का तूफान सब उड़ा ले जाएगा!