Rahul Gandhi : बंगाल में लोकतंत्र नहीं ‘गुंडाराज’, आसनसोल हिंसा पर भड़के राहुल गांधी

Bindash Bol

* क्या ‘दीदी’ के गढ़ में लोकतंत्र की बलि चढ़ रही है? राहुल गांधी का ‘गुंडाराज’ वाला प्रहार और बढ़ता सियासी पारा!

Rahul Gandhi : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 अब अपने निर्णायक और सबसे विस्फोटक मोड़ पर खड़ा है। 29 अप्रैल को होने वाले अंतिम चरण के मतदान से पहले सूबे की सियासी जमीन खून से लाल हो उठी है। आसनसोल में कांग्रेस कार्यकर्ता देबदीप चटर्जी की नृशंस हत्या ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं, बल्कि राहुल गांधी को ममता बनर्जी के खिलाफ उस आक्रामक मुद्रा में ला खड़ा किया है, जिसने विपक्षी एकता (I.N.D.I.A.) के भविष्य पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।

राहुल का ‘एक्स’ पर विस्फोट: “टीएमसी का चरित्र ही हिंसा है”

​लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस बार ‘सॉफ्ट पॉलिटिक्स’ को किनारे रखकर ममता सरकार पर सीधा और तीखा हमला बोला है। राहुल ने दो टूक कहा….

“पश्चिम बंगाल में आज लोकतंत्र नहीं, टीएमसी का गुंडाराज चल रहा है। वोट के बाद विरोधी आवाजों को डराना, मारना और मिटाना ही टीएमसी का असली चरित्र बन चुका है।”

​राहुल का यह बयान महज एक संवेदना नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के ‘बंगाल मॉडल’ पर एक बड़ा प्रहार है। उन्होंने साफ कर दिया कि कांग्रेस इस ‘खूनी राजनीति’ के सामने घुटने नहीं टेकेगी।

बीजेपी की ‘चांदी’, टीएमसी बैकफुट पर?

​सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि राहुल गांधी का यह हमला अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी के लिए ‘ऑक्सीजन’ का काम कर रहा है। बंगाल बीजेपी ने तंज कसते हुए राहुल को ‘सच बोलने के लिए’ धन्यवाद तक कह डाला है। जानकारों का मानना है कि जब कांग्रेस और टीएमसी जैसे दल आपस में भिड़ते हैं, तो एंटी-ममता वोटों का ध्रुवीकरण बीजेपी के पक्ष में आसान हो जाता है।

अंतिम चरण: 142 सीटें और साख की लड़ाई

​29 अप्रैल को 142 सीटों पर होने वाला मतदान यह तय करेगा कि बंगाल की सत्ता की चाबी किसके पास जाएगी। एक तरफ ममता बनर्जी का ‘किला’ बचाने की जद्दोजहद है, तो दूसरी तरफ बीजेपी और कांग्रेस के हमले।

रिपोर्ट के मुख्य बिंदु जो चर्चा का विषय हैं…

* कानून-व्यवस्था का जनाजा: आसनसोल की घटना ने साबित किया है कि चुनाव आयोग की सख्ती के बावजूद जमीन पर ‘बाहुबल’ हावी है।

* कांग्रेस का सख्त रुख: प्रसेनजीत पुइतांडी के करीबी देबदीप की हत्या को कांग्रेस ने ‘राज्य प्रायोजित हिंसा’ करार दिया है।

* सियासी समीकरण: क्या राहुल गांधी का यह कड़ा रुख ममता बनर्जी को मुस्लिम और सेकुलर वोटों के मोर्चे पर कमजोर करेगा?

बंगाल की राजनीति अब ‘विकास’ से हटकर ‘बदले’ और ‘वर्चस्व’ की लड़ाई बन चुकी है। राहुल गांधी के ‘गुंडाराज’ वाले ठप्पे ने चुनाव के अंतिम चरण को बेहद दिलचस्प और तनावपूर्ण बना दिया है। क्या जनता इस ‘हिंसा’ का जवाब ‘ईवीएम’ से देगी?

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