Hamza Burhan : ‘प्रिंसिपल’ के मुखौटे में छिपे भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी पर हमला, मौत और ज़िंदगी के बीच छिड़ा ड्रामा!

Bindash Bol

Hamza Burhan : पाकिस्तान के मुज़फ़्फ़राबाद से आज एक ऐसी सनसनीखेज ख़बर आई, जिसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से लेकर पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के दफ़्तरों तक हड़कंप मचा दिया है। भारत का मोस्ट वांटेड आतंकी और अल-बद्र (Al-Badr) का कमांडर हमज़ा बुरहान (असली नाम: अर्जुमंद गुलज़ार डार) एक जानलेवा हमले का शिकार हुआ है।

लेकिन इस पूरी घटना के पीछे की जो इनसाइड स्टोरी सामने आ रही है, वह किसी सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म से कम नहीं है!

इस पूरे घटनाक्रम में एक और बड़ा मोड़ सामने आया है। बताया जा रहा है कि मुज़फ़्फराबाद के रहने वाले अब्दुल्ला कमाल ने इस हमले को अंजाम दिया। सूत्रों के अनुसार, यह हमला किसी आतंकी ऑपरेशन का हिस्सा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत दुश्मनी का परिणाम था।

घटना के बाद अब्दुल्ला कमाल ने खुद ही पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया और फिलहाल आतंकवाद-रोधी इकाई (CTD) की हिरासत में है।

यह वही हमज़ा बुरहान है जो 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में आतंकियों को ग्रेनेड और विस्फोटक सप्लाई करने का मास्टरमाइंड था। भारत सरकार ने 2022 में इसे UAPA के तहत आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था।

पाकिस्तान की ISI ने इसे दुनिया की नज़रों से छिपाने के लिए मुज़फ़्फ़राबाद में एक प्राइवेट कॉलेज का ‘प्रिंसिपल’ बना रखा था। इतना ही नहीं, एक आम नागरिक का भेष होने के बावजूद इसकी सुरक्षा में AK-47 से लैस बॉडीगार्ड्स तैनात रहते थे।

लेकिन आज सुबह मोटरसाइकिल पर आए हमलावर (अब्दुल्ला कमाल) ने बहुत नज़दीक से इस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।

सुबह भारतीय मीडिया में ख़बर आई कि हमज़ा बुरहान मौक़े पर ही ढेर हो गया। लेकिन शाम होते-होते इस कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट आ गया है।

ग्राउंड ज़ीरो और पाकिस्तानी इंटेलिजेंस सूत्रों से जो ताज़ा जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक….

●​उसे 3 गोलियां लगी हैं,लेकिन हमले में वह तुरंत मरा नहीं, बल्कि गोलियां सीधे उसके सिर में लगी हैं।

●शुरुआती इलाज के बाद पाकिस्तानी सेना और ISI ने उसे गुपचुप तरीक़े से मुज़फ़्फ़राबाद के कम्बाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) के स्पेशल विंग में शिफ़्ट कर दिया है।

​●वह इस वक़्त ‘लाइफ़ सपोर्ट’ (वेंटिलेटर) पर है। डॉक्टरों के मुताबिक उसकी हालत बेहद नाज़ुक है और वह ‘क्लिनिकली डेड’ जैसी स्थिति में है, जहाँ बचने की उम्मीद न के बराबर है।

​पाकिस्तानी मीडिया इस पूरी घटना को महज़ “एक कॉलेज प्रिंसिपल पर आपसी रंजिश में हमला” दिखाकर पेश कर रहा है। सवाल यह है कि अगर वह सिर्फ़ एक प्रिंसिपल था, तो मिलिट्री अस्पताल (CMH) को छावनी में क्यों बदल दिया गया? क्यों किसी को अंदर जाने की इजाज़त नहीं है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ISI इसके वेंटिलेटर सपोर्ट को हटाकर मौत की आधिकारिक घोषणा करने में जानबूझकर देरी कर रही है, ताकि ​हिरासत में लिए गए हमलावर से पूछताछ की जा सके कि इस ‘टारगेट किलिंग’ के पीछे किसका हाथ है।

​पाकिस्तान में पनाह लिए बैठे अन्य आतंकियों में खौफ़ का माहौल न पैदा हो।

भेष बदलने से पाप नहीं छुपते!

चाहे वह अस्पताल के वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें गिन रहा हो या दम तोड़ चुका हो, भारत के दुश्मनों का हश्र अब पाकिस्तान की धरती पर बस एक ही है…. मौत!
       

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