• IMEC भारत को यूरोप से तेज और सस्ता व्यापारिक मार्ग देगा।
• ट्रिएस्टे पोर्ट यूरोप के नए प्रवेश द्वार के रूप में उभर रहा है।
• परियोजना चीन के BRI के रणनीतिक विकल्प के तौर पर देखी जा रही है।
• भारत-इटली साझेदारी में AI, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी पर भी फोकस।
• IMEC भारत को वैश्विक सप्लाई चेन और भू-राजनीति का बड़ा खिलाड़ी बना सकता है।
Modi Meloni : तुलसी बाबा ने अनायास ही नहीं लिखा था जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी, टुच्चे गुलछर्रेबाज लोग ‘मेलोडी और मेलोनी’ को छिछोरपंती पर ले आये हैं पर देश को इसके उलट गंभीर बात देखनी चाहिए। 20 मई को रोम में हुई ऐतिहासिक बैठक ने भारत और इटली के बीच के संबंधों को एक नए स्तर पर पहुँचा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने द्विपक्षीय संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का दर्जा देकर यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले समय में भारत और यूरोप के बीच आर्थिक, सामरिक और तकनीकी सहयोग का नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। इस साझेदारी के केंद्र में सबसे अधिक चर्चा जिस परियोजना की रही, वह थी IMEC यानी “इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर”। यह केवल एक व्यापारिक गलियारा नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था का प्रतीक बनता जा रहा है।
IMEC की अवधारणा पहली बार वैश्विक मंच पर उस समय सामने आई जब भारत, अमेरिका, यूरोप, सऊदी अरब, यूएई और अन्य साझेदार देशों ने मिलकर एक ऐसे कॉरिडोर की कल्पना की जो भारत को सीधे पश्चिम एशिया और यूरोप से जोड़े। इसका उद्देश्य समुद्री और रेल मार्गों के माध्यम से तेज, सुरक्षित और आधुनिक व्यापार नेटवर्क तैयार करना है। यह परियोजना भारत के लिए इसलिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारतीय व्यापार को यूरोप तक पहुँचने के लिए अधिक तेज और कम लागत वाला रास्ता मिलेगा। अब तक भारत को यूरोपीय बाजारों तक पहुँचने में लंबी समुद्री दूरी और कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। IMEC इस स्थिति को बदल सकता है, IMEC से हम अपने घरेलू प्रोडक्ट्स के मेगा -लोड की ढूलाई आसानी से कम खर्च में कर सकते हैं जिसके लिए मोदी की हिंदुत्ववादी सरकार पहले दिन से प्रतिबद्ध हैं, दुनिया में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए माल ढूलाई (लॉजिस्टिक्स) की कीमत कम होनी ही चाहिए
इस साझेदारी में इटली की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बनकर उभरी है। विशेष रूप से इटली का ट्रिएस्टे पोर्ट यूरोप के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित हो रहा है। यह बंदरगाह भूमध्यसागर के माध्यम से यूरोप के कई देशों से जुड़ा हुआ है। यदि भारत से आने वाला माल खाड़ी देशों के रास्ते ट्रिएस्टे पहुँचता है, तो वहाँ से वह आसानी से पूरे यूरोप में वितरित किया जा सकेगा। इससे भारत के निर्यात को नई गति मिलेगी और भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार में अधिक अवसर प्राप्त होंगे। भारत और इटली के बीच हुई बातचीत में समुद्री परिवहन और बंदरगाह सहयोग को लेकर कई समझौते हुए। यह समझौते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन और वैश्विक व्यापार नेटवर्क को भी मजबूत किया जाएगा। आज के समय में जिस देश की सप्लाई चेन जितनी मजबूत होती है, उसकी आर्थिक शक्ति उतनी ही अधिक मानी जाती है। कोविड महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया ने यह महसूस किया कि केवल एक क्षेत्र या एक देश पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। इसलिए भारत और यूरोप दोनों ऐसे वैकल्पिक मार्ग विकसित करना चाहते हैं जो सुरक्षित और स्थायी हों।
IMEC का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव यानी BRI के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। पिछले एक दशक में चीन ने एशिया, अफ्रीका और यूरोप में बड़े पैमाने पर निवेश करके अपने व्यापारिक और सामरिक प्रभाव को बढ़ाया है। चीन ने बंदरगाह, रेलवे, सड़क और ऊर्जा परियोजनाओं के माध्यम से कई देशों को अपने आर्थिक नेटवर्क से जोड़ लिया। हालांकि कई देशों ने बाद में यह शिकायत की कि चीनी निवेश के कारण वे कर्ज के जाल में फँस गए। श्रीलंका के हम्बनटोटा बंदरगाह का उदाहरण अक्सर इस संदर्भ में दिया जाता है।
भारत लंबे समय तक इन वैश्विक व्यापारिक मार्गों का केवल उपयोगकर्ता बना रहा, लेकिन अब स्थिति बदल रही है। IMEC के माध्यम से भारत पहली बार ऐसे अंतरराष्ट्रीय कॉरिडोर के निर्माण में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। यह केवल आर्थिक परिवर्तन नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक शक्ति का संकेत भी है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और कई वैश्विक कंपनियाँ चीन के विकल्प के रूप में भारत की ओर देख रही हैं। ऐसे समय में IMEC भारत को वैश्विक व्यापार के केंद्र में ला सकता है। IMEC का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। यह भू-राजनीतिक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करेगा। पश्चिम एशिया लंबे समय से वैश्विक राजनीति का केंद्र रहा है। यदि भारत, यूरोप और खाड़ी देश मिलकर एक मजबूत आर्थिक नेटवर्क बनाते हैं, तो इससे क्षेत्रीय स्थिरता और सहयोग को भी बढ़ावा मिल सकता है। यह परियोजना कई देशों के साझा हितों को जोड़ती है और इसलिए इसकी सफलता वैश्विक राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण होगी।
भारत और इटली के बीच तकनीकी सहयोग भी इस नई साझेदारी का अहम हिस्सा है। दोनों देशों ने “INNOVIT” इनोवेशन हब की घोषणा की है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर काम किया जाएगा। यह अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले दशकों में वही देश वैश्विक शक्ति बनेंगे जो नई तकनीकों में नेतृत्व करेंगे। भारत के पास युवा प्रतिभा और डिजिटल क्षमता है, जबकि इटली और यूरोप के पास उन्नत अनुसंधान और औद्योगिक अनुभव है, दोनों का सहयोग नई संभावनाओं को जन्म दे सकता है।मोबाइल फोन से लेकर रक्षा उपकरणों तक, हर आधुनिक तकनीक में सेमीकंडक्टर चिप्स की आवश्यकता होती है, कोविड के बाद दुनिया ने सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन की कमजोरी को महसूस किया। भारत अब इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इटली और यूरोप के अन्य देशों जिनमे जर्मनी नॉर्वे स्वीडन के साथ साझेदारी भारत को इस दिशा में तकनीकी सहायता और निवेश प्रदान कर सकती है।
हालांकि IMEC के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं। पश्चिम एशिया में राजनीतिक अस्थिरता, क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा संबंधी खतरे इस परियोजना की गति को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा इतने बड़े बुनियादी ढाँचे के निर्माण के लिए भारी निवेश और दीर्घकालिक राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता होगी जो आजकल चीन अपने प्रोजेक्ट्स को लेकर कर रहा हैं भारत यह संभावना यूरोप और मिडिल ईस्ट में धुंध रहा हैं। यदि IMEC के साझेदार देश मिलकर काम करते हैं, तो यह परियोजना आने वाले दशकों में वैश्विक व्यापार की दिशा बदल सकती है।यह परियोजना भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक रणनीतिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकती है।