* “विपक्षी एकता की दीवार में दरारें गहरी होती दिख रही हैं। बंगाल से दिल्ली तक बदलते राजनीतिक समीकरण क्या NDA को देंगे नया संजीवनी मंत्र?”
INDIA Alliance : देश की राजनीति में इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या INDIA गठबंधन टूट की तरफ बढ़ रहा है? पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक जो घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, उन्होंने विपक्षी एकता की नींव को हिला दिया है। एक तरफ ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में बगावत खुलकर सामने आ गई है, तो दूसरी तरफ INDIA गठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाने लगे हैं।
TMC में महाफुट, 20 सांसदों की बगावत की चर्चा
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद TMC के भीतर असंतोष विस्फोटक रूप लेता दिख रहा है। वरिष्ठ नेताओं की नाराज़गी, संगठन में टूट और लोकसभा के करीब 20 सांसदों के अलग गुट बनाकर NDA के संपर्क में होने की चर्चाओं ने ममता बनर्जी की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय का इस्तीफा इस संकट का सबसे बड़ा प्रतीक माना जा रहा है। भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर उठे सवालों ने पार्टी की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया है।
राहुल गांधी बने INDIA गठबंधन की कमजोरी?
भाजपा और कई राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि बंगाल चुनाव के दौरान राहुल गांधी द्वारा ममता बनर्जी पर किए गए हमलों ने विपक्षी एकता को कमजोर किया। कांग्रेस और उसके सहयोगियों के बीच अविश्वास बढ़ा है।
सूत्रों के अनुसार DMK, लेफ्ट और कई क्षेत्रीय दल इस बात से नाराज़ हैं कि कांग्रेस सहयोगी दलों को मजबूत करने के बजाय अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में लगी रहती है। यही कारण है कि INDIA गठबंधन के भीतर खींचतान लगातार बढ़ रही है।
क्या DMK भी बदल सकती है पाला?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस की कार्यशैली को लेकर दक्षिण भारत के कुछ सहयोगी दलों में असहजता है। हालांकि DMK की ओर से NDA में जाने का कोई आधिकारिक संकेत नहीं है, लेकिन बदलते समीकरणों ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
यदि दक्षिण भारत की राजनीति में कोई बड़ा पुनर्संयोजन होता है, तो इसका सीधा असर राष्ट्रीय राजनीति और संसद के शक्ति संतुलन पर पड़ेगा।
NDA के लिए सुनहरा मौका
लोकसभा और राज्यसभा में महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए भाजपा को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत रहती है। यदि TMC या INDIA गठबंधन के अन्य दलों के सांसद NDA का समर्थन करते हैं, तो केंद्र सरकार की स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकती है।
यही वजह है कि भाजपा विपक्षी खेमे में चल रही उथल-पुथल को एक बड़े राजनीतिक अवसर के रूप में देख रही है।
पंजाब पर भाजपा की नई रणनीति
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संकेत दिया है कि पश्चिम बंगाल की सफलता के बाद अब भाजपा का अगला बड़ा लक्ष्य पंजाब है। पार्टी इस बार पहले से कहीं अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
भाजपा का मानना है कि आम आदमी पार्टी की सरकार कानून-व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन और नशे की समस्या पर विफल रही है। ऐसे में भाजपा पंजाब में खुद को मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की रणनीति पर काम कर रही है।
क्या बिखर जाएगा INDIA गठबंधन?
INDIA गठबंधन की सबसे बड़ी समस्या उसका आंतरिक विरोधाभास है। जिन राज्यों में क्षेत्रीय दल मजबूत हैं, वहां कांग्रेस उनकी प्रतिद्वंद्वी है। ऐसे में केवल भाजपा विरोध के आधार पर गठबंधन को लंबे समय तक एकजुट रखना आसान नहीं दिखता।
बंगाल में TMC की टूट, सहयोगी दलों की नाराज़गी और नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चाओं ने विपक्ष के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है।
सवाल सिर्फ TMC की बगावत का नहीं है, बल्कि पूरे विपक्षी ढांचे की स्थिरता का है। यदि आने वाले महीनों में दलबदल और असंतोष का सिलसिला बढ़ता है, तो NDA को संसद में नई ताकत मिल सकती है। वहीं INDIA गठबंधन को अपने अस्तित्व और विश्वसनीयता को बचाने के लिए बड़ी राजनीतिक सर्जरी करनी पड़ सकती है।
फिलहाल राजनीतिक संदेश साफ है—विपक्ष भाजपा को घेरने से पहले अपने घर की दरारें भरने की चुनौती से जूझ रहा है।