Hindi Vyangya : आफ्टर ऑल मैं पति हूँ

Niranjan Srivastava

Hindi Vyangya : मैं अरस्तू के बाद सबसे दुर्दांत चिंतक शरद जोशी को मानता हूँ। उनका कहना है कि मनुष्य एक विवाहशील प्राणी है। शादी करना हर मनुष्य का कॉमन मिनिमम प्रोग्राम है। अपने कुंवारेपन का दम्भ भरने वाले दिग्गज कुंवारों के एक न एक दिन शादी के मंडप में सरे आम शादी करते पकड़े जाने की खबरें अक्सर अखबार की सुर्खियाँ बनती हैं।

दकियानूस लोगों का कहना है कि कुंवारा और आवारा में कोई बुनियादी फर्क नहीं है। कुंवारा होना ब्रह्मचारी होने की गारंटी नहीं है। हमारे पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटलजी स्वयं इस बात की तस्दीक कर चुके हैं।पुरुष हो या स्त्री, उनकी कुँवारागर्दी के कारण भारत भूमि को बड़े-बड़े हादसे झेलने पड़े हैं। विश्वामित्र शादीशुदा होते तो उन्हें तपस्या करने की नौबत नहीं आती। तब इंद्र मेनका को उनके पास भेजने का रिस्क न उठाते और न मेनका बेचारी फंसती।

महाभारत का मुख्य कारण भीष्म का कुंवारापन था। विनोबा भावे मामूली कुंवारे नहीं थे। उनके भूदान आंदोलन के एक ही वार से तेलंगाना आंदोलन अधमरा हो गया और बिहार और उत्तर प्रदेश में गांधीवाद क्षतिग्रस्त। एक और कुँवारे वी० के० कृष्णमेनन को स्वतंत्र भारत के पहले घोटाले (जीप घोटाला) का श्रेय है। महिला मुख्य मंत्रियों के कुंवारेपन के कारण राजनैतिक स्थिरता पैदा होती है। चेन्नई और उत्तर प्रदेश इसके ज्वलन्त उदाहरण रहे हैं।

हमारे युवा काल में शादियाँ थ्रू प्रॉपर चैनल होती थीं।अब अधिकतर शादियाँ बाप बीती नहीं, आप बीती होती हैं। उन दिनों बाजार में उपलब्ध अलग-अलग क़्वालिटी के पतियों के अलग-अलग रेट थे। जब मेरी शादी तय हुई तब मैं शिक्षकनुमा जीव था। उन दिनों शिक्षक के बनिस्पत एक थानेदार या लोक निर्माण विभाग का जूनियर इंजीनियर बेहतर पति होने की हैसियत रखता था।

मेरी शादी तय करने में मेरे और मेरी पत्नी के पिताओं का अप्रतिम योगदान रहा हालांकि निमंत्रण में जगन्नियन्ता की असीम अनुकम्पा को शादी का कारण बतलाया गया। आखिरकार नौ रसों से युक्त विवाह नामक सांस्कृतिक कार्यक्रम निर्विघ्न सम्पन्न हुआ और मैं एक अदद कन्या पति बन गया। और मैं क्या बनता ? करोड़पति बनने की गुंजाइश थी नहीं, राष्ट्रपति बनने की योग्यता और क्षमता मुझमें थी नहीं। मरता क्या न करता। अस्तु, मैं अच्छा भला, उपयोगी, विश्वसनीय और तत्पर पति बन कर रह गया। आई मीन सस्ता, विश्वसनीय और टिकाऊ पति। पतियों के मामले में यह जुमला लागू नहीं होता कि पहले इस्तेमाल करें फिर विश्वास करें।

एक पति के रूप में मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि मैं पिछले चौंसठ वर्षों से पूरी शालीनता के साथ इस पद पर कायम हूँ। हमारे जमाने के पतियों को यह प्रिविलेज था कि वे उच्च कोटि के लुच्चे होते हुए आजीवन पति के पद पर बने रह सकते थे। अब ऐसा नहीं है। मेरी और मेरी पत्नी की दूसरी उपलब्धि यह है कि हमने पांच बच्चे पैदा किये जो अब स्वयं शादीशुदा हैं और स्वयं पतित्व और पत्नीत्व को प्राप्त हो चुके हैं। यह हमारे शान्तिपूर्ण सहअस्तित्व का ज्वलन्त उदाहरण है।

मेरी पत्नी सामान्य नाक-नक्शे वाली है। भगवान ने मेरा भी चौखटा इस तरह अहिंसक बनाया कि आज तक किसी सुंदरी के इस पर मरने का दिलकश हादसा नहीं हुआ। दूसरी बात यह है कि मेरी आँखें बचपन से ही घायल थीं अर्थात मैं “माइऑपिक” हूँ। इसलिए आँखें किसी से लड़ जायें इसकी कोई संभावना न थी और न है। बिना चश्मे के मैं दूर दर्शन का आनन्द नहीं उठा सकता और सचश्मा इधर उधर झांकने पर पाबंदी लगी रही। हालांकि यह मेरे मौलिक अधिकारों का हनन है लेकिन घर में युद्ध विराम भंग हो इसके लिए मैं यह सब सहता हूं।

मेरा दावा है कि मैं एक आदर्श पति हूँ। मैं अपनी पत्नी के दबंगपन के कारण मटुकनाथ होने से बच गया जबकि इसकी सारी संभावनाएं मेरे अंदर विद्यमान थीं। बदनामी का खतरा लेकर अविवाहित कन्याओं को विवाहित जीवन का आनंद देने वाले कई अनुभवी मटुकनाथों को मैं जानता हूँ। लेकिन विधि-व्यवस्था के भंग होने के डर से अक्सर मुँह नहीं खोलता।

समाज तेजी से बदला है। अब पति परमेश्वर या प्राणनाथ नहीं होता। भावी पतियों पर खतरे मंडराते देख रहा हूँ। उन्हें मेरी सलाह है कि जब शादी तय हो जाय तो अखबार में यह नोटिस छपवाएँ कि मैं अमुक, पुत्र अमुक, साकिन अमुक, थाना अमुक, जिला अमुक पूरे होशो हवाश में यह घोषणा करता हूँ कि अमुक तारीख को अमुक महाशय की अमुक नामक कन्या से मेरा विवाह होना तय हुआ है। अगर उस कन्या को या उसके किसी भूतपूर्व या अभूतपूर्व प्रेमी, संगी या मित्र को कोई कोई उज्र हो तो इत्तिला करें। यह सावधानी बरतना जरूरी है क्योंकि अब भावी पत्नियों द्वारा भावी पतियों के कत्ल की सुपारी दिए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
मेरी पत्नी उपमा से रूपक होते हुए उत्प्रेक्षा में आ गई है। मैं भी बुढ़ापे की चपेट में आकर उजड़ा दयार हो गया हूँ। नकली दाँत और हेयर कलर लगा कर बुढ़ापे को ढंकता हूँ जैसे चमकदार विज्ञापन से सरकार अपनी नाकामिययाँ छिपाती है।

फिर भी मेरा सौभाग्य है कि मैं अपनी इकलौती पत्नी का शुद्ध एकमेव पति हूँ। मेरी कुछ सनक उसे लिहाजन पसंद हैं। आदर्श आर्य ललना जो ठहरी। और मैं? आफ्टर ऑल मैं एक पति हूँ, ऑल इंडिया हैसियत का पति। हमारे मॉडल के पति अब विंटेज पति हो गए हैं।

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