Rajya Sabha Election 2026 : 10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को वोटिंग होनी है. नामांकन का आखिरी दिन सोमवार ( 8 जून) था. जिन राज्यों में चुनाव है वो मध्य प्रदेश (3 सीट), राजस्थान (3 सीट), झारखंड (2 सीट), गुजरात (4 सीट), कर्नाटक (4 सीट), आंध्र प्रदेश (4 सीट), मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश की 1-1 सीट शामिल है. इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा मध्य प्रदेश और झारखंड की है, क्योंकि यहां पर बीजेपी ने कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है. किस राज्य में कौन निर्विरोध जीत रहा और कहां फंसा है चुनाव, आइए जानते हैं.
गुजरात में बीजेपी के चारों उम्मीदवारों की जीत पक्की
गुजरात से राज्यसभा चुनाव के लिए BJP के चारों उम्मीदवारों ने अपने नॉमिनेशन पेपर सोमवार को दाखिल किए. कांग्रेस के चुनाव न लड़ने की वजह से उनकी जीत पक्की लग रही है. इस महीने के आखिर में शक्तिसिंह गोहिल का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही संसद के ऊपरी सदन में गुजरात से कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि नहीं रहेगा. गुजरात की चार राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं क्योंकि मौजूदा सांसद रामभाई मोकारिया, नरहरि अमीन और रमीलाबेन बारा (सभी BJP से) और कांग्रेस के शक्तिसिंह गोहिल का कार्यकाल 21 जून को खत्म हो रहा है. गोहिल राज्यसभा में गुजरात से कांग्रेस के अकेले सदस्य हैं. बीजेपी ने इस बार के चुनाव में राजूभाई शुक्ला, मानसिंह परमार, मुकेशभाई राठवा और जितेंद्र कंजारिया को उम्मीवार बनाया है.
मणिपुर और राजस्थान में भी निर्विरोध जीत रहे उम्मीदवार
मणिपुर में बीजेपी ने अधिकारिमयुम सरदा देवी को टिकट दिया है. उनके निर्विरोध चुने जाने का रास्ता लगभग साफ है. बीजेपी की मणिपुर यूनिट की पहली महिला प्रेसिडेंट सरदा देवी को पार्टी ने राज्य से अकेली राज्यसभा सीट के लिए मैदान में उतारा है.
राजस्थान में 3 सीटों के लिए चुनाव है. बीजेपी के दो उम्मीदवारों की जीत तय है, जबकि कांग्रेस के एक उम्मीदवार का निर्विरोध चुने जाने का रास्ता साफ है. बीजेपी ने सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को उतारा है. वहीं कांग्रेस ने नीरज डांगी को टिकट दिया है.
मध्य प्रदेश में दिलचस्प हुआ चुनाव
इस चुनाव में सबसे ज्यादा फोकस मध्य प्रदेश और झारखंड पर है. मध्य प्रदेश में तीन सीटों के लिए चुनाव है. बीजेपी ने तीसरे उम्मीदवार को उतारकर लड़ाई को रोमांचक बना दिया है. दो सीटों पर बीजेपी की जीत तय है. मुकाबला तीसरी सीट के लिए है. बीजेपी के महेश केवट और कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन के बीच टक्कर है.
तीसरी सीट का गणित
- विधानसभा में प्रभावी विधायक: 228
- राज्यसभा की एक सीट
• जीतने के लिए जरूरी वोट: 58 - बीजेपी विधायक: 164
- कांग्रेस विधायक: 64
- बीएपी विधायक: 1
- विजयपुर विधायक मतदान नहीं कर सकेंगे
बीजेपी का गणित…
- दो सीटें जीतने के लिए आवश्यक वोट: 116
•164 में से 116 वोट खर्च होने के बाद बीजेपी के पास बचेंगे 48 वोट - तीसरी सीट जीतने के लिए चाहिए 58 वोट
- यानी बीजेपी को अतिरिक्त 10 वोटों की जरूरत होगी
कांग्रेस का गणित…
- कांग्रेस के प्रभावी वोट: 63
- (बीना विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति स्पष्ट नहीं)
- बीएपी का समर्थन मिलने पर आंकड़ा 64 तक पहुंच सकता है
- जीत के लिए जरूरी 58 वोट से 6 वोट अधिक
बीजेपी की तीसरी सीट की चुनौती
बीजेपी के पास अपने 48 वोट हैं, लेकिन जीत के लिए उसे 58 वोट चाहिए. यानी कम से कम 10 अतिरिक्त वोटों की व्यवस्था करनी होगी. इसके लिए विपक्षी खेमे में क्रॉस वोटिंग या अतिरिक्त समर्थन निर्णायक भूमिका निभा सकता है. इसी संभावना ने राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को सबसे दिलचस्प बना दिया है.
झारखंड में भी रोमांचक लड़ाई
झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव है. महागठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के उम्मीदवार मैदान में हैं. कांग्रेस ने प्रणब झा को टिकट दिया है तो JMM ने बैधनाथ राम को उतारा है. निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी ने सत्ताधारी दल की टेंशन बढ़ा दी है. परिमल नाथवानी को बीजेपी समर्थन दे रही है. बीजेपी के पास 21 विधायक हैं, 1 विधायक आजसू और 1 लोजपा रामविलास और 1 जेडीयू विधायक सरयू राय नाथवानी को समर्थन दे रहे हैं.
नाथवानी के पक्ष में कुल 24 विधायक खड़े हैं, जबकि जितने के लिए 28 विधायकों का समर्थन आवश्यक है. नाथवानी को जीत के लिए जो 4 विधायक चाहिए़ वो सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा या कांग्रेस के विधायक ही हो सकते हैं. इंडिया ब्लॉक को झारखंड में दो राज्यसभा की सीट जीतने के लिए 56 विधायकों का समर्थन चाहिए. अगर उसमें से एक भी वोट आगे पीछे होता है तो फिर मुश्किल बढ़ेगी. परिमल नाथवानी बतौर निर्दलीय उम्मीदवार पहले भी 2 बार झारखंड से राज्यसभा का चुके हैं. पहले के दोनों ही राज्यसभा चुनाव में नाथवानी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा का समर्थन प्राप्त किया. राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि नाथवानी बड़े ही आराम से अपनी जीत दर्ज करेंगे. उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से खबर है कि राजद के विधायकों के साथ-साथ शीर्ष नेतृत्व से पैचअप हो चुका है. कांग्रेस पार्टी में घबराहट इस बात को लेकर है कि कहीं पार्टी में भीतर घात ना हो जाए और झारखंड मुक्ति मोर्चा बिहार और असम का बदला ना ले ले. ऊंट किस करवट बदलेगा यह तो समय ही बताएगा.
आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में क्या हाल?
आंध्र प्रदेश में 4 सीटों के लिए चुनाव है. NDA में शामिल टीडीपी के 3 और जन सेना का एक उम्मीदवार मैदान में है. वर्तमान में, वाईएसआरसीपी के पास सात राज्यसभा सीटें हैं, जबकि टीडीपी के पास दो सीटें हैं. 18 जून को होने वाले चुनाव के बाद इन आंकड़ों में बदलाव आने की उम्मीद है.
विधानसभा में टीडीपी के पास 135 विधायक हैं. उसके बाद जन सेना के पास 21 और बीजेपी के पास 8 विधायक हैं, जबकि वाईएसआरसीपी के 11 विधायक हैं. इस चुनाव में टीडीपी की स्थिति बेहद मजबूत मानी जा रही है.
आंध्र प्रदेश की तरह कर्नाटक में भी राज्यसभा की 4 सीटों के लिए चुनाव है. यहां कीन तीन सीटों पर कांग्रेस की जीत तय मानी जा रही है, जबकि विपक्ष के खाते में एक सीट जा सकती है. कांग्रेस पार्टी ने कर्नाटक में मल्लिकार्जुन खरगे, मंसूर अली खान और पवन खेड़ा को टिकट दिया है. जबकि बीजेपी ने एम नागराज को उतारा है.
अरुणाचल-मिजोरम और मेघालय की भी स्थिति जानिए
अरुणाचल प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट के लिए होने वाले चुनाव में बीजेपी ने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ताई तागाक को टिकट दिया है. अरुणाचल प्रदेश विधानसभा की 60 सीटों में से सत्ताधारी बीजेपी के पास भारी बहुमत है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि चुनाव में तागाक की जीत होगी.
मिजोरम में जोरम पीपल्स मूवमेंट (ZPM) ने पार्टी के प्रवक्ता के. लालतलुआंगकिमा को एकमात्र संसदीय सीट के लिए नॉमिनेट किया है. मौजूदा विधानसभा में ZPM के पास 27 विधायक हैं, जिससे उन्हें निर्णायक बढ़त मिली हुई है, जबकि मुख्य विपक्षी पार्टी मिज़ो नेशनल फ्रंट (MNF) के पास 10 और BJP के पास दो सीटें हैं. यहां से लालतलुआंगकिमा की जीत तय मानी जा रही है.
मेघालय में एक सीट के लिए चुनाव है. नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) के नेता और पूर्व विधायक जेम्स पीके संगमा मैदान में हैं. जेम्स पीके संगमा मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (MDA) के उम्मीदवार हैं. संगमा का राज्यसभा पहुंचना तय है.