TMC : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक ऐसा सस्पेंस छाया हुआ है, जिसने सत्ता के गलियारों में हलचल मचा दी है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बगावत की खबरों के बीच एक चिट्ठी सामने आई है, जिस पर 19 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। लेकिन इस चिट्ठी में एक ऐसी बात है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है—सीरियल नंबर 13 पूरी तरह खाली है।
अब सवाल उठ रहा है… क्या यह महज संयोग है या किसी बड़े राजनीतिक धमाके की तैयारी? आइए जानते हैं कि आखिर पर्दे के पीछे क्या खिचड़ी पक रही है…
क्या है 19 सांसदों वाली चिट्ठी का पूरा खेल?
TMC के कुछ सांसद पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। इन सांसदों ने लोकसभा में खुद को अलग समूह के रूप में मान्यता देने और पार्टी के चुनाव सिंबल पर दावा करने के लिए स्पीकर को एक लेटर भेजा है। दो सांसदों ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार भी किया है कि उन्होंने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, स्पीकर कार्यालय की ओर से अभी तक इस पत्र की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
आखिर ‘नंबर 13’ पर किसका इंतजार?
जानकारी के मुताबिक, लोकसभा स्पीकर को जो चिट्ठी भेजी गई है, उसमें बकायदा 1 से लेकर 20 तक की नंबरिंग (सीरियल नंबर) की गई है। इस पर 19 सांसदों ने अपने दस्तखत भी कर दिए हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें सीरियल नंबर 13 के आगे किसी का साइन नहीं है, वो जगह बिल्कुल खाली छोड़ी गई है! अब सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज है कि यह खाली जगह पार्टी के किसी बहुत बड़े और कई बार के सांसद के लिए रखी गई है। माना जा रहा है कि वो बड़ा चेहरा सही मौका देखकर इस लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराएगा। इस एक खाली स्लॉट ने ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की टेंशन बढ़ा दी है।
बागी सांसदों की रणनीति क्या है?
बागी गुट का कहना है कि लोकसभा में वही असली TMC का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका दावा है कि उन्हें अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए। अब यह फैसला स्पीकर के पास है। नियमों के मुताबिक दस्तावेजों की जांच और सांसदों से बातचीत के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
अभिषेक बनर्जी निशाने पर क्यों हैं?
इस पूरी बगावत की मुख्य वजह हाल ही में मिली चुनावी हार को माना जा रहा है। पार्टी के कई पुराने और वरिष्ठ नेताओं का आरोप है कि संगठन में उनकी बातों और सुझावों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। सांसदों के गुस्से का सीधा निशाना ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी हैं। बात इतनी बढ़ चुकी है कि वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी ने तो साफ कह दिया है कि ममता दीदी को अब उनके और अभिषेक में से किसी एक को चुनना होगा।
आगे क्या हो सकता है?
1. पार्टी और सिंबल पर कब्जा
अगर इन 19 सांसदों को लोकसभा स्पीकर और चुनाव आयोग से मान्यता मिल जाती है (जैसा महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे और अजीत पवार के साथ हुआ था), तो ये बिना इस्तीफा दिए ‘असली टीएमसी’ बन जाएंगे और सिंबल पर कब्जा कर लेंगे।
2. NDA में मर्जर
कानून के मुताबिक, दलबदल कानून से बचने के लिए दो-तिहाई सांसदों का होना जरूरी है। 28 में से दो-तिहाई यानी कम से कम 19 सांसद होते हैं। अगर ये ग्रुप चाहे तो सीधे एनडीए (NDA) को समर्थन दे सकता है या बीजेपी में शामिल हो सकता है। बागी नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात भी की है।
3. महुआ मोइत्रा का तीखा हमला
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर साफ कहा है कि इन कानून तोड़ने वालों को नियम नहीं पता। उन्होंने कहा कि इन सभी 19 लोगों को इस्तीफा देकर दोबारा बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या ‘नंबर 13’ सिर्फ एक खाली जगह है, या पश्चिम बंगाल की राजनीति का अगला सबसे बड़ा विस्फोट उसी में छिपा है?