Jharkhand Exam Scam :  ‘मुन्नाभाई’ नहीं, यह था सिस्टम का ‘सुपरमैन’! एक साथ 2 सरकारी-प्राइवेट नौकरियां और 13 साल में 12 टॉपर रैंक… जानिए अभय तिवारी के ‘डबल रोल’ की पूरी इनसाइड स्टोरी

Bindash Bol

Jharkhand Exam Scam : झारखंड परीक्षा घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, फाइलों से एक ऐसा किरदार निकलकर सामने आ रहा है जिसकी करतूतों ने ‘मुन्नाभाई’ की स्क्रिप्ट को भी फीका कर दिया है। घोटाले का मुख्य सूत्रधार अभय तिवारी सिर्फ पेपर लीक करने वाला दलाल नहीं था, बल्कि वह सिस्टम की आंखों में धूल झोंकने वाला ऐसा ‘बहुरूपिया’ था, जो एक ही वक्त में दो अलग-अलग जिंदगियां जी रहा था।

​जांच एजेंसियों के भी उस वक्त होश उड़ गए, जब अभय तिवारी के इस ‘डबल रोल’ और उसके चौंकाने वाले कारनामों की परतें खुलीं।

खेल-1: दिन में सरकारी अफसर ‘अभय’, रात में प्राइवेट मैनेजर ‘मनोज’

​कागजों और बायोमेट्रिक व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए अभय तिवारी ने एक ही समय में दो अलग-अलग कंपनियों/विभागों से सैलरी उठाने का अजूबा कर दिखाया…

* ​असली पहचान (अभय तिवारी): गोड्डा जिले में बाकायदा ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) के पद पर तैनात था।

* ​नया अवतार (मनोज तिवारी): टीडीपीएल (TDPL) नामक कंपनी में फर्जी नाम बदलकर मार्केटिंग मैनेजर की कुर्सी संभाल रहा था।

​एक ही व्यक्ति, दो अलग शहर, दो अलग नाम और दोनों जगह से हर महीने खाते में आता सरकारी और कॉरपोरेट का मोटा वेतन! प्रशासनिक ढर्रे को उसने जिस सफाई से चपत लगाई, वह जांच अधिकारियों के लिए भी पहेली बना हुआ है।

खेल-2: परीक्षा देने का ‘शौक’ नहीं, करोड़ों का ‘मार्केटिंग स्टंट’!

​आमतौर पर मुन्नाभाई दूसरों के लिए परीक्षा देते हैं, लेकिन अभय तिवारी खुद परीक्षा देने बैठता था और हर बार टॉपर बन जाता था। सीआईडी (CID) की जांच के मुताबिक, पिछले 13 सालों में उसने जो भी परीक्षा छुई, वह सोना बन गई।
​उसने एक-दो नहीं, बल्कि 12 बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं एक ही प्रयास में क्रैक कीं…

* ​इंडियन नेवी (SSR) और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (असिस्टेंट)

* ​नॉर्दर्न कोलफील्ड लिमिटेड और सीआरपीएफ हेड कांस्टेबल

* ​JSSC पुलिस सब-इंस्पेक्टर, JSSC PGT

* ​JPSC (ACF, FRO, FSO)

आखिर क्यों देता था इतनी परीक्षाएं?

यह अभय की सबसे शातिर चाल थी। वह इन रिज़ल्ट्स को अपनी ‘मार्केटिंग प्रोफाइल’ की तरह इस्तेमाल करता था। कोचिंग सेंटरों और भोले-भाले अभ्यर्थियों के सामने अपने टॉपर वाले स्कोरकार्ड रखकर वह यह साबित करता था कि “पूरा परीक्षा तंत्र मेरी जेब में है।”

खेल-3: रेट लिस्ट फिक्स, 10 लाख एडवांस और
की ‘गारंटी’

​जब अभ्यर्थियों पर उसका रोब जम जाता, तब शुरू होता था करोड़ों का असली सौदा। JPSC परीक्षा पास कराने के लिए उसने बाकायदा रेट कार्ड बना रखा था….

₹10 लाख का एडवांस टेबल पर आते ही अभय तिवारी अभ्यर्थी को नियुक्ति पत्र की ‘गारंटी’ दे देता था।

खेल-4: ‘अकेले क्यों खाएं?’—पूरे परिवार को बना दिया अफसर

​अभय तिवारी ने इस फर्जीवाड़े की गंगा में सिर्फ खुद हाथ नहीं धोए, बल्कि अपने पूरे कुनबे को सरकारी सिस्टम में ‘एडजस्ट’ करवा दिया। उसने अपने भाई, भाभी और साली को भी इसी सिंडिकेट के दम पर सरकारी नौकरी में सेट करवाया। खास बात यह रही कि कोई भी पिछले दरवाजे से नहीं घुसा; सिस्टम की सांठ-गांठ से बाकायदा परीक्षा दिलाई गई, टॉपर बनाया गया और सरकारी नियुक्ति पत्र हाथ में थमा दिया गया।

सिस्टम पर उठते बड़े सवाल

13 साल तक 12 परीक्षाएं टॉप करने वाला और एक साथ दो-दो नौकरियां करने वाला अभय तिवारी आज सलाखों के पीछे है, लेकिन उसकी यह कहानी यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर हमारा परीक्षा और प्रशासनिक तंत्र कितना खोखला हो चुका था कि एक अकेला शख्स इतने सालों तक पूरे प्रदेश की व्यवस्था को अपनी उंगलियों पर नचाता रहा!

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