Pakistan : क्या पाकिस्तान एक बार फिर सैन्य तख्तापलट की ओर बढ़ रहा है? क्या फील्ड मार्शल और सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब पर्दे के पीछे से नहीं, बल्कि सीधे सत्ता की कमान अपने हाथ में लेना चाहते हैं? इस सवाल ने पाकिस्तान की राजनीति में हलचल मचा दी है। वजह हैं गृह मंत्री मोहसिन नक़वी, जिनके लगातार विवादित बयानों ने अपनी ही शहबाज़ शरीफ़ सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि सरकार के खिलाफ इतने तीखे हमलों के बावजूद न प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ खुलकर जवाब दे पा रहे हैं और न ही सत्ताधारी पार्टी PML-N के नेता। बल्कि नवाज़ शरीफ़ ने अपने नेताओं को सार्वजनिक प्रतिक्रिया देने से तक रोक दिया। राजनीतिक गलियारों में इसे सेना और सरकार के बीच बढ़ती खींचतान का संकेत माना जा रहा है।
‘पूरा सिस्टम फेल है’—नक़वी के बयानों से मचा भूचाल
मोहसिन नक़वी ने 21 साल पुराने कथित One Constitution Avenue घोटाले का जिक्र करते हुए पूरे सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया। उनका दावा था कि दो दशक तक जज, नौकरशाह, नेता और बैंकिंग सिस्टम मिलकर भ्रष्टाचार को संरक्षण देते रहे और पूरी व्यवस्था मूकदर्शक बनी रही।
इसके बाद पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट में उन्होंने एक और बड़ा हमला बोला।
“आप मानें या न मानें, पाकिस्तान का सिस्टम पूरी तरह ढह चुका है। दस साल बाद भी यही बातें होंगी, लेकिन कुछ नहीं बदलेगा।”
यही नहीं, उन्होंने भारत के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि अगर नाराज़ युवा एकजुट हो गए तो पूरा सिस्टम हिल सकता है।
सरकार बेबस, मंत्री बेलगाम
नक़वी के इन बयानों के बाद प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से उनकी मुलाकात भी हुई, लेकिन सार्वजनिक तौर पर उनसे जवाब तक नहीं मांगा गया। दूसरी ओर रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर सिस्टम खराब है तो गृह मंत्री पहले अपना मंत्रालय सुधारें।
शहबाज़ शरीफ़ के सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने भी नक़वी के बयान को उनका “निजी विचार” बताकर पल्ला झाड़ लिया। सवाल उठने लगे कि आखिर एक मंत्री अपनी ही सरकार पर इतने बड़े आरोप लगाकर भी कार्रवाई से कैसे बच जा रहा है?
आखिर मोहसिन नक़वी ही क्यों?
यहीं से कहानी का सबसे अहम अध्याय शुरू होता है।
पाकिस्तान की राजनीति में यह चर्चा तेज है कि मोहसिन नक़वी सिर्फ गृह मंत्री नहीं, बल्कि आसिम मुनीर के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते हैं। दोनों के पारिवारिक रिश्तों को लेकर भी लगातार चर्चाएं होती रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नवंबर 2022 में आसिम मुनीर के सेना प्रमुख बनने के बाद नक़वी का राजनीतिक कद अचानक बढ़ना कोई संयोग नहीं था। पहले उन्हें पंजाब का केयरटेकर मुख्यमंत्री बनाया गया और बाद में देश का गृह मंत्री, जिससे सुरक्षा और खुफिया तंत्र की कमान भी उनके हाथ में आ गई।
क्या सत्ता पर सीधा कब्ज़ा चाहते हैं मुनीर?
हाल के संवैधानिक बदलावों के बाद आसिम मुनीर की ताकत पहले से कहीं अधिक बढ़ चुकी है। ऐसे में पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेज हैं कि सेना अब पर्दे के पीछे से सरकार चलाने के बजाय सत्ता पर प्रत्यक्ष नियंत्रण चाहती है।
आलोचकों का आरोप है कि मोहसिन नक़वी लगातार ऐसे बयान देकर शहबाज़ सरकार को कमजोर कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता बढ़े और सेना के लिए सत्ता संरचना बदलने का माहौल तैयार हो सके।
बदलाव की पटकथा या सिर्फ राजनीतिक अटकलें?
पाकिस्तान में पहले भी कई बार सेना ने लोकतांत्रिक सरकारों को अपदस्थ किया है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि अब तक ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं है कि सेना तख्तापलट की तैयारी कर रही है या आसिम मुनीर राष्ट्रपति बनने की दिशा में औपचारिक कदम उठा रहे हैं।
लेकिन एक बात तय है—मोहसिन नक़वी के बयानों ने पाकिस्तान की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस पर है कि यह सिर्फ सत्ता के भीतर की खींचतान है या फिर पाकिस्तान एक बार फिर बड़े राजनीतिक भूचाल की ओर बढ़ रहा है।