Mamata Banerjee : ममता बनर्जी की नई सियासी पारी…. TMC में दोफाड़ के बाद चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, ‘दीदी’ को मिला ‘फुटबॉल’ सिंबल

Bindash Bol

Mamata Banerjee : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बेहद नाटकीय मोड़ पर, चुनाव आयोग ने दो हिस्सों में बंटी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दोनों गुटों के नए नाम और चुनाव चिन्हों का ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग के इस फैसले के साथ ही राज्य की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है।

दोनों गुटों को मिले नए नाम और चुनाव चिन्ह

* ममता बनर्जी का गुट: ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले धड़े को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम दिया गया है, और उनका नया चुनाव चिन्ह ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ होगा।

* ऋतब्रत बनर्जी का गुट: बागी और बहुमत वाले ऋतब्रत बनर्जी के गुट का नाम ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ रखा गया है, जिसे ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह मिला है।

​चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोनों ही दलों को पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा में राजनीतिक दल के रूप में मान्यता दी गई है।

ममता और फुटबॉल: पुराना नाता और ‘खेला होबे’ का जादू

​ममता बनर्जी के लिए ‘फुटबॉल’ केवल एक चुनाव चिन्ह नहीं, बल्कि उनके जुझारू राजनीतिक सफर का प्रतीक है।

* ​चोट और जज्बा: साल 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान नंदीग्राम में नामांकन के वक्त ममता बनर्जी के पैर में गंभीर चोट (फैक्चर) आ गई थी।

* ​व्हीलचेयर से किक: प्लास्टर बंधे पैर और व्हीलचेयर पर बैठकर कोलकाता की एक रैली में उन्होंने फुटबॉल पर किक मारकर अपने बुलंद हौसलों का परिचय दिया था।

* ​’खेला होबे’ का नारा: उसी दौरान गूंजा ‘खेला होबे’ का नारा बंगाल चुनाव का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जिसके दम पर TMC ने प्रचंड बहुमत (215 सीटें) हासिल किया था।

हार के बाद बिखराव और उपचुनाव की अग्निपरीक्षा

​बंगाल के राजनीतिक समीकरण बदलने और पार्टी में टूट के बाद यह संकट पैदा हुआ था।

* ​सांसदों और विधायकों का मोहभंग: पार्टी के लोकसभा सांसदों की संख्या 28 से घटकर 8 और राज्यसभा में 13 में से 2 सांसदों के इस्तीफे के बाद स्थिति कमजोर हुई। वहीं, विधानसभा में 80 में से 58 विधायक बागी गुट के साथ चले गए, जिससे ममता के पास सिर्फ 22 विधायक बचे।

* ​नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव: चुनाव आयोग का यह फैसला आगामी 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले आया है। इन उपचुनावों में दोनों गुट अपने-अपने नए नाम और चिन्हों के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे, जिनके नतीजे 9 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

​कभी ‘घास-फूल’ के सहारे बंगाल की सत्ता पर राज करने वाली तृणमूल कांग्रेस अब दो अलग-अलग पहचान के साथ नए सियासी रण में उतरने को तैयार है।

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