* भारत और चीन समेत दुनिया के बड़े ऊर्जा खरीदारों पर बढ़ा अमेरिका का दबाव।
* ‘सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने किए दस्तखत।
Trump Tariff : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कड़ा कदम उठाते हुए “सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026” (H.R. 5334) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही यह नया कानून अब अमेरिका में लागू हो गया है, जिसका सीधा असर भारत और चीन समेत रूस से ऊर्जा आयात करने वाले प्रमुख देशों पर पड़ेगा। आइए इस नए भू-राजनीतिक घटनाक्रम को आसान और स्पष्ट बिंदुओं के जरिए समझें…
इस नए कानून की मुख्य बातें
* 100% तक टैरिफ का अधिकार: इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार मिल गया है कि वे रूस से कच्चा तेल या नेचुरल गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगा सकते हैं।
* किन देशों पर है नजर: यह नियम उन देशों पर शिकंजा कसता है जो पिछले 12 महीनों में रूस के शीर्ष-5 ऊर्जा खरीदारों में शामिल रहे हैं। इसमें भारत और चीन जैसे बड़े देश प्रमुख रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
* लागू होने की समयसीमा: यह कानून राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर प्रभावी हो जाएगा।
* व्यापक दायरे वाले प्रतिबंध: ऊर्जा क्षेत्र के अलावा यह कानून रूस के रक्षा उद्योग, नेतृत्व और उसकी कथित ‘शैडो फ्लीट’ (प्रतिबंधों से बचने वाले जहाजों के बेड़े) पर भी कड़ी कार्रवाई का प्रावधान करता है।
क्या इस कानून में किसी छूट का प्रावधान है?
हाँ, गैस आयात के मामले में कुछ देशों को राहत मिल सकती है….
* यदि किसी देश का रूसी गैस आयात, रूस के कुल गैस निर्यात के 15% से कम है।
* यदि उस देश ने अपने रूसी गैस आयात को लगातार कम करने के लिए ठोस और महत्वपूर्ण कदम उठाए हों।
राष्ट्रपति के पास विशेष अधिकार
हालांकि यह कानून बेहद सख्त है, लेकिन इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति को यह छूट दी गई है कि वे अपने विवेक से तय कर सकें कि किस देश पर टैरिफ लगाया जाए, उसकी दर कितनी (100% तक) हो और किसे इस दायरे से बाहर रखना है या छूट देनी है।
