Maharashtra Politics :महाराष्ट्र में फिर सियासी भूचाल! उद्धव ठाकरे के 7 सांसदों पर मंडराया ‘ऑपरेशन टाइगर’ का साया, आज हो सकता है बड़ा खेल

Siddarth Saurabh

Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक धमाका होने के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सात सांसदों के पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे गुट का दामन थामने की अटकलों ने उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अगर यह राजनीतिक समीकरण सच साबित होता है तो लोकसभा में उद्धव गुट को बड़ा झटका लग सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार सुबह दिल्ली में इन सांसदों की अहम बैठक शिवसेना नेता और सांसद श्रीकांत शिंदे के आवास पर प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी मौजूद रहेंगे। बैठक के बाद सांसद अलग गुट बनाने का दावा पेश करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं।

उद्धव खेमे में बढ़ी बेचैनी

राजनीतिक हलचल तेज होते ही उद्धव ठाकरे खेमा भी सक्रिय हो गया है। पार्टी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर मांग की है कि यदि कोई अलग गुट दावा करता है तो उसे मान्यता न दी जाए। पार्टी नेतृत्व लगातार अपने सांसदों से संपर्क बनाए हुए है।

किन सांसदों के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं?

राजनीतिक गलियारों में जिन सात सांसदों के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें मुंबई उत्तर-पूर्व से संजय दीना पाटिल, यवतमाल-वाशिम से संजय देशमुख, हिंगोली से नागेश पाटील आष्टीकर, धाराशिव से ओमराजे निंबालकर, शिर्डी से भाऊसाहेब वाकचौरे, परभणी से संजय जाधव और नासिक से राजाभाऊ (पराग) वाजे शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि इनमें से कई सांसद सार्वजनिक रूप से अब तक उद्धव ठाकरे के प्रति अपनी निष्ठा दोहरा चुके हैं और किसी भी तरह के दल-बदल से इनकार करते रहे हैं। इसके बावजूद दिल्ली में होने वाली बैठक ने महाराष्ट्र की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है।

‘ऑपरेशन टाइगर’ क्या है?

पिछले कुछ समय से महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ की खूब चर्चा है। इसके तहत दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (UBT) के सांसदों और नेताओं को शिंदे गुट में शामिल कराने की कोशिशें चल रही हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि किसी भी पक्ष ने नहीं की है।

इन सांसदों की राजनीतिक अहमियत क्यों है?

इन सातों सांसदों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे गुट को महाराष्ट्र के अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जीत दिलाई थी। इनमें मुंबई, मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक रूप से बेहद अहम इलाके शामिल हैं। इसलिए यदि इनमें से बड़ी संख्या में सांसद पाला बदलते हैं तो यह केवल संख्या का नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे की राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक ताकत पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।

आज के घटनाक्रम पर टिकी निगाहें

अब सबकी नजर दिल्ली में होने वाली बैठक और उसके बाद लोकसभा अध्यक्ष से संभावित मुलाकात पर है। यदि सात सांसद अलग गुट बनाने का दावा करते हैं तो महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा अध्याय जुड़ सकता है। वहीं अगर यह केवल राजनीतिक दबाव की रणनीति साबित होती है, तो उद्धव ठाकरे फिलहाल राहत की सांस ले सकते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है और आज का दिन शिवसेना की राजनीति की दिशा बदल सकता है।

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