Sharad Pawar : टीएमसी-यूबीटी के बाद अब शरद पवार की बारी? दिल्ली दौरे ने बढ़ाया सस्पेंस, क्या ‘ऑपरेशन कमल’ की अगली मंजिल बारामती!

Bindash Bol

Sharad Pawar : राजनीति में दोस्ती स्थायी नहीं होती, सिर्फ समीकरण स्थायी होते हैं। पश्चिम बंगाल में टीएमसी और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में उठे सियासी तूफान के बाद अब नजरें शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) पर टिक गई हैं। सवाल उठ रहा है—क्या अब बारामती की बारी है?
सूत्रों और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार का दिल्ली दौरा महज औपचारिक नहीं था। क्या दिल्ली में सिर्फ चाय पी गई या फिर सत्ता की नई पटकथा भी लिखी गई? यही सवाल महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा रहा है।

NCP में भी ‘ऑपरेशन टूट’?

चर्चा है कि शरद पवार खेमे के कुछ सांसद मूल एनसीपी के संपर्क में हैं। कहा जा रहा है कि यदि पांच सांसद पाला बदलते हैं तो शरद पवार के सामने वही संकट खड़ा हो सकता है, जिसका सामना हाल ही में उद्धव ठाकरे को करना पड़ा।
दिलचस्प बात यह है कि बारामती की सियासत में कभी चुनावी प्रतिद्वंद्वी रहीं सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार अब एक नई राजनीतिक पहेली के केंद्र में हैं। सवाल यह भी है कि क्या परिवार आखिरकार राजनीति पर भारी पड़ेगा या राजनीति फिर परिवार को दो हिस्सों में बांट देगी?

मोदी सरकार का बढ़ता गणित

एनडीए खेमे का दावा है कि मानसून सत्र तक उसका आंकड़ा और मजबूत हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो परिसीमन जैसे बड़े विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में सरकार को और ताकत मिल सकती है। यही वजह है कि विपक्ष के हर संभावित टूट की चर्चा अब राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गई है।

शरद पवार के सामने दो रास्ते!

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि पार्टी में असंतोष बढ़ता है तो शरद पवार के सामने सिर्फ दो विकल्प बचेंगे…
बहू सुनेत्रा पवार के नेतृत्व को स्वीकार करें।
या फिर सुप्रिया सुले को मूल एनसीपी के साथ विलय के लिए राजी करें।
अगर इनमें से कोई रास्ता नहीं चुना गया तो बगावत की आशंका और तेज हो सकती है। हालांकि, अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अब यूपी में भी ‘लाल टोपी ऑपरेशन’?

बंगाल, महाराष्ट्र… और अब उत्तर प्रदेश। समाजवादी पार्टी को लेकर भी सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। भाजपा नेताओं के दावों ने अटकलों को और हवा दे दी है। फिलहाल राजनीति में अफवाहें भी उतनी ही तेजी से दौड़ रही हैं, जितनी तेजी से नेता दल बदल रहे हैं।
फिलहाल इतना तय है कि सत्ता के शतरंज पर मोहरे लगातार बदल रहे हैं। अब अगली चाल कौन चलता है—शरद पवार, सुनेत्रा पवार या फिर दिल्ली—इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

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